
new born child
जयपुर .
बदली जीवन-शैली, रहन-सहन और खानपान ने अब बच्चों को भी न्यूरो संबंधी बीमारी की आगोश में लेना शुरू कर
दिया है। पहले बच्चों में मात्र मिर्गी रोग के मामले ही सुनने में आते थे, लेकिन अब बच्चे न्यूरो संबंधी अन्य बीमारियों की चपेट में भी आने लगे हैं। गौर करने वाली बात यह है कि कुछ एहतियात बरतकर और सावधानी रखकर इन मासूमों को तंत्रिका तंत्र संबंधी इन बीमारियों से बचाया जा सकता है।
न्यूरोलोजिस्ट डॉ.एस.पी.पाटीदार ने बताया कि बच्चों में होने वाले न्यूरो संबंधी कई रोग ऐसे हैं, जिनके मामले में सावधानी रखी जाए या फिर समय रहते इनको समझ लिया जाए तो बच्चों को इन रोगों से छुटकारा दिलाया जा सकता है। इन रोगों को जानने के लिए सबसे पहले इन रोगों के लक्षणों को जानना और समझना बेहद जरूरी है। जन्म के समय शिशु का नहीं रोना न्यूरो संबंधी रोग का एक महत्वपूर्ण और अहम लक्षण है। यदि बच्चा बढ़ती उम्र में वस्तुओं, खिलोनों आदि पर अपनी पकड़ नहीं बना पाता तो भी वह न्यूरो संबंधी बीमारी से ग्रसित हो सकता है।
न्यूरो संबंधी विकारों पर चल रहा है शोध -:
विशेषज्ञों ने बताया कि बच्चों में लगातार बढ़ रहे न्यूरो संबंधी विकारों के बारे में डॉक्टरों के कई संगठन शोध कर रहे हैं। जन्म के बाद बच्चों के सिर को अच्छे तरीके से देख लेना चाहिए कि वहां किसी भी प्रकार का घाव या निशान तो नही हैं। इससे ब्रेन डेमेज के मामले को सुलझाया जा सकता है। बच्चों का बार-बार सर्दी-खांसी या जुकाम, बुखार, गले में गांठ का दिखाई पडऩा भी उनमें न्यूरो संबंधी बीमारियों का संकेत हो सकता है।
बच्चों में ये होती है न्यूरो संबंधी बीमारियां -:
बच्चों में जो न्यूरो संबंधी विकार देखने को मिल रहे हैं उनमें मुख्य रूप से जन्मजात तंत्रिका जनित रोग, जन्म के समय होने वाला ब्रेन डेमेज, संक्रमण से होने वाले रोग, मीर्गी का दौरा आना, बचपन में होने वाला लकवा आदि शामिल हैं।
Published on:
23 Apr 2018 09:24 pm
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