
जयपुर। राजस्थान में सतही व भूजल दोहन रोकने और उसकी सुरक्षा के लिए जल्द नया कानून लागू होगा। यह राजस्थान वाटर (कंजर्वेशन, प्रोटेक्शन एंड रेग्युलेशन) एक्ट ( Rajasthan Water Act ) होगा, जिसका ड्राफ्ट मुख्यमंत्री (बतौर मंत्री) को भेजा गया है। विधानसभा के मौजूदा सत्र के तत्काल बाद इसे फाइनल किया जाएगा। अभी पानी से जुड़े आधा दर्जन से ज्यादा एक्ट हैं। सरकार की मंशा है कि कम से कम एक्ट हों और उनकी प्रभावी रूप से पालना कराई जा सके। राजस्थान में तेजी से कम होते भूजल से जुड़ी नीति आयोग की रिपोर्ट के बाद राज्य सरकार ने इसमें तेजी दिखाई है। खास यह है एक्ट बनने के बाद सतही व भूजल दोनों एक ही एक्ट की जद में होंगे।
अभी भूजल दोहन रोकने, उसके संरक्षण के लिए किसी तरह कानून ही नहीं है। इसमें न केवल सरकारी अफसरों की जिम्मेदारी तय होगी, बल्कि आमजन भी इसकी जद में होंगे। पानी बचाना अनिवार्य हो जाएगा। पानी का दुरुपयोग, दोहन करने और परिशोधित नहीं करने वालों के खिलाफ एक्शन होगा।
इनकी जिम्मेदारी
राज्य जल संसाधन नियोजन विभाग, जलदाय विभाग, नगरीय निकाय, जल संसाधन विभाग, सिंचाई विभाग, उद्योग विभाग, इंदिरा गांधी नहर परियोजना सहित 17 सरकारी एजेंसियों के बीच मंथन किया गया।
पेनल्टी, सजा का प्रावधान
3 माह से एक साल तक सजा
10 हजार रुपए से एक लाख रुपए तक की पेनल्टी
किसी तरह की पानी के दुरुपयोग, चोरी व अवैध दोहन करने पर यह प्रावधान किया गया है। इसमें बांध, कैनाल से लेकर पेयजल लाइन तक शामिल है।
नीति आयोग में जल संकट की तस्वीर
नीति आयोग की रिपोर्ट में जल संकट की तस्वीर सामने आई चुकी है। जयपुर में 230 प्रतिशत आंकड़ा भूजल दोहन का बताया गया।
राज्य के 33 जिलों में से अभी 26 जिले डार्क जोन में हैं। इसमें 13 ब्लॉक जयपुर में है, जिनमें से 12 डार्क जोन में और एक क्रिटिकल श्रेणी में है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पहले पंचायतों को चिठ्ठी लिखी और फिर मन की बात में जल संरक्षण का आहृवान किया।
ये खत्म होंगे एक्ट
अभी चार एक्ट प्रभावी हैं, इनके मुख्य प्रावधान का प्रस्तावित बिल में समायोजन किया जाएगा। इसके अलावा राजस्थान रीवर बेसिन एण्ड वाटर रिसोर्सेज प्लानिंग एक्ट, 2015 है, जो लागू रहेगा लेकिन इसके कुछ प्रावधान प्रस्तावित एक्ट में भी शामिल होंगे।
1. राजस्थान वाटर रिसोर्सेज रेग्युलेशन एक्ट, 2012
2. इरीगेशन एण्ड ड्रेनेज एक्ट, 1954
3. राजस्थान फार्मर पार्टिसिपेशन इन मैनेजमेंट ऑफ इरीगेशन एक्ट, 2000
4. फ्लड प्लेन जोन एक्ट, 1990
जनता की इस तरह जिम्मेदारी होगी तय
घरेलू उपभोक्ता : घर तक पेयजल पहुंचाने का जिम्मा होगा, लेकिन इसे व्यर्थ गंवाने, प्रावधान के तहत नहीं सहेजने और चोरी करने की स्थिति मिलने पर जिम्मेदारी तय होगी।
कॉमर्शियल : पानी को दोबारा उपयोगी बनाने पर काम करना होगा। इसमें भी बड़े वाणिज्यिक व इंडस्ट्रीज मामलों में जल बचाने से जुड़ी तकनीक में निवेश करना अनिवार्य होगा। पानी बचाना, सहेजने के लिए नई—नई तकनीक के जरिए आगे आना होगा।
पानी का दुरुपयोग रुके, इसके लिए प्रभावी तरीके से उपयोग करने के लिए प्रस्तावित वाटर एक्ट जल्द लागू होगा। संबंधित सभी विभागों से चर्चा अंतिम चरण में है। विधानसभा सत्र के बाद इसके ड्राफ्ट को फाइनल करेंगे।
-अमरजीत सिंह, मुख्य अभियंता, स्टेट वॉटर रिसोर्सेज डवलपमेंट प्रोजेक्ट
Published on:
06 Mar 2020 12:00 pm
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