
पहले शहर का बिगाड़ा हश्र, अब 22 साल के लिए नया मास्टर प्लान!
जयपुर। जयपुर शहर का चौथा मास्टर प्लान 22 साल के लिए बनेगा। भारत की आजादी के 100 पूरे होने के कारण मास्टर प्लान 2047 के लिए होगा, जबकि पहले यह 25 साल के लिए बनाने का प्लान था। खास यह है मौजूदा मास्टर प्लान की अक्षरश: पालना कराने में अफसर फेल साबित हुए हैं। अभी इसके आधार पर काम हो तो ही नए मास्टर प्लान की जरूरत नहीं पड़े। प्रस्तावित नए मास्टर प्लान में भी ज्यादातर वही काम शामिल करने की तैयारी है, जो अधूरे हैं। नए मास्टर प्लान को लेकर हाल ही उच्च स्तरीय बैठक भी हुई। मौजूदा मास्टर प्लान 2025 तक लागू है।
तो नहीं बढ़ेगा एरिया
-अभी मास्टर प्लान का क्षेत्रफल 2940 वर्ग किलोमीटर है। इसमें 725 गांव शामिल है।
-इसमें से करीब 1 हजार वर्ग किलोमीटर एरिया तो करीब-करीब खाली पड़ा है। शहर का विस्तार आसानी से यहां किया जा सकेगा।
-11 सेटेलाइट टाउन और 4 ग्रोथ सेंटर है, जो अब तक विकसित नहीं किए गए।
-इस आधार पर विचार चल रहा है कि मास्टर प्लान के एरिया को नहीं बढ़ाया जाए।
खा गए 700 हैक्टेयर इकोलोजिकल इलाका, अब सर्वे
नेता और अफसरों की शह पर राज्य में इकोलोजिकल जोन की 700 हैक्टेयर से ज्यादा भूमि पर निर्माण का दायरा बढ़ चुका है। इसमें मुख्य रूप से जयपुर का आगरा रोड व आमेर तहसील का इलाका शामिल है, इसके अलावा उदयपुर, अजमेर में भी कुछ हिस्सा है। इसके बावजूद विभाग एक्शन लेने की बजाय जिम्मेदार अफसरों को बचाने में जुटा रहा। इसमें जयपुर शहर व आस-पास के क्षेत्र में करीब 400 वर्ग किलोमीटर एरिया है। अब इस जोन में सर्वे कराया जाएगा, जिससे की पता चल सके की वर्ष 2011 के बाद से अब तक कितना निर्माण हो गया। हालांकि, इस सर्वे का फायदा कैसे मिलेगा, यह स्पष्ट होना जरूरी है।
अब तक तीन मास्टर प्लान
1. पहला मास्टर प्लान- वर्ष 1971 से 1991 तक (बाद में इसे वर्ष 1998 तक बढ़ाया गया)। इसमें 391 वर्ग किलोमीटर एरिया और 132 गांव शामिल किए गए थे।
2. दूसरा मास्टर प्लान- वर्ष 1998 से 2011 तक प्रभावी रहा। इसमें 1959 वर्ग किलोमीटर एरिया और 478 गांव शामिल किए गए।
3. तीसरा मास्टर प्लान- वर्ष 2011 से 2025 तक के लिए। 2940 वर्गकिलोमीटर क्षेत्रफल है और इसमें 725 गांव शामिल हैं।
लोगों को पहले यह चाहिए
1. रहने योग्य शहर हो, यानी यहां जीवनयापन के लिए जरूरी सुविधाएं सुलभता से उपलब्ध हो। इसमें साफ पानी, कचरा मुक्त शहर, चौबीस घंटे पानी व बिजली सप्लाई, सुदृढ़ ड्रेनेज व सीवरेज सिस्टम, सार्वजनिक शौचालय।
2. सड़क क्षेत्र के साथ साथ फुटपाथ एरिया भी बढ़े, क्योंकि राहगीरों की किसी को चिंता नहीं है।सार्वजनिक परिवहन नीति में अंकित है कि सड़क क्षेत्र में चलने का पहला अधिकार राहगीर का है।
3. हर एरिया में सेन्ट्रल पार्क की तर्ज पर ऑक्सीजोन विकसित हो।
Published on:
02 Feb 2023 10:06 pm
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