
Bisalpur dam
जयपुराइट्स बारिश के सुहाने मौसम में शहर की अलग-अलग जगहों पर घूमने के साथ अब शहर से दूर हरियाली की चादर ओढ़ चुके पहाड़ों के पास भी घूमने निकल रहे है। इनमें सबसे लोकप्रिय स्थलों में पुष्कर, अजमेर, बीसलपुर बांध, रणथंभौर, भानगढ़ के साथ सामोद जाना पसंद कर रहे है। लोग घूमने के साथ पिकनिक, ट्रेकिंग, जंगल सफारी, फोटोग्राफी आदि के लिए इन जगहों पर जाना पसंद कर रहे है। म्यूजिकल लॉन्ग ड्राइव पर मॉनसून फूड के साथ अपनी ट्रिप को खास बनाने में जुटे हुए हैं।
भानगढ़ ने ओढ़ी हरियाली की चादर
सुहाने मौसम में लोग अलवर स्थित भानगढ़ की ओर अपने कदम बढ़ा रहे है। यह जयपुर से करीब 80 किलोमीटर दूर स्थित है, यहां का किला और आस-पास की जगह हमेशा से स्थानीय स्तर पर काफी लोकप्रिय रही है। मानसून में यह पूरी तरह हरियाली की चादर में ढक चुका है, ऐसे में लोग यहां भी जाना पसंद कर रहे है। यहां भगवान सोमेश्वर, गोपीनाथ, मंगला देवी और केशव राय के प्रमुख मंदिर हैं।
अध्यात्म के साथ साथ नेचर का आनंद लेने के लिए जयपुराइट्स इन दिनों पुष्कर का रुख कर रहे है। पुष्कर को तीर्थ की नगरी कहा जाता है। यह जयपुर से करीब 145 किमी की दूरी पर है। पुष्कर में चारों तरफ पहाड़ो से घिरा एकमात्र बह्म मंदिर है। यहां पहाड़ी पर बने पंचकुंड तीर्थ मंदिर तक लोग ट्रेकिंग के जरिए पहुंचकर मौसम का आंनद उठा रहे है। यहां पर रोप वे भी है, जो काफी आकर्षक है।
जंगल सफारी और फोटोग्राफी
हरा-भरा प्राकृतिक वातावरण के साथ जंगल सफारी और पिकनिक के लिए रणथंभोर काफी चर्चाओं में रहता है। इस समय लोग काफी जा रहे है। प्रकृति प्रेमियों के साथ देशी और विदेशी पर्यटकों के लिए यह पर्यटन स्थलों में से एक है। वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर्स के लिए यह जगह स्वर्ग से कम नहीं है।
बांध के प्राकृतिक नजारे
मौसम के मिजाज के साथ वीकेंड पर बीसलपुर बांध पर पर्यटकों की भीड़ उमड़ रही है। यहां जयपुर के साथ अजमेर सहित कई जिले से पर्यटकों की आवाजाही बढ़ रही है। यह बांध टोंक जिले में बनास नदी पर बना है, जो कई शहरों की प्यास बुझाने के साथ सिंचाई की जरूरतों को पूरा कर रहा है। बीसलपुर गांव में भगवान गोकर्णेश्वर के प्राचीन मंदिर के लिए यह प्रसिद्ध है। बारिश के दौरान बांध से नजारा देखना यादगार साबित हो जाता है।
सामोद टेम्पल से नजारे
मानसून के मौसम में पिकनिक के लिए पंसदीदा जगह में से सामोद वीर हनुमान मंदिर एक है। यह मंदिर जयपुर से 40 किमी की दूरी पर स्थित है। सामोद पर्वत पर 1100 सीढ़ियों पर चढ़कर मंदिर तक पहुंचना होता है।
Published on:
01 Aug 2022 10:02 pm
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