शहर की कला, संस्कृति, परिधान और खान पान से सैलानियों को रू-ब-रू कराने के लिए शुरू किए गए नाइट बाजार पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के एक आदेश से संकट के बादल खड़े हो गए हैं। हैरिटेज निगम की मनमानी से वर्षों इंतजार के बाद प्रोजेक्ट पर फिलहाल ब्रेक लग गए हैं।
जयपुर. शहर की कला, संस्कृति, परिधान और खान पान से सैलानियों को रू-ब-रू कराने के लिए शुरू किए गए नाइट बाजार पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के एक आदेश से संकट के बादल खड़े हो गए हैं। हैरिटेज निगम की मनमानी से वर्षों इंतजार के बाद प्रोजेक्ट पर फिलहाल ब्रेक लग गए हैं।
दरअसल जिस मानसागर की पाल पर नाइट बाजार शुरू किया गया था वो इको सेंसिटिव जोन में आता है। बिना अनुमति ने हैरिटेज निगम ने नाइट बाजार शुरू करवा दिया। वैसे भी यह जगह मुफीद ही नहीं थी। पहले इसे परकोटे के किसी एक बाजार में लगाए जाने का प्रयास किया जा रहा था। एनजीटी के फैसले के बाद नए विकल्पों पर निगम अधिकारी विचार कर रहे हैं।
ऐसे हुई मनमानी
1-अनुबंध में कम्पनी को 50 कियोस्क लगाने थे।
हुआ यह: मौके पर कपड़े के पर्दे लगाकर मेले जैसा माहौल बना दिया गया।
2-शहर के नामचीन नामों को इससे जोड़ना था, ताकि सैलानियों को गुणवत्ता वाली वस्तुएं मिल सकें।
हुआ यह: तीन हजार रुपए प्रतिदिन का किराया लेकर मानसागर की पाल पर बैठने वाले लोगों को ही एंट्री दे दी।
3-शनिवार सुबह बाजार स्थल पर सामान लेकर आना था और सोमवार सुबह तक हटाना था।
हुआ यह: शुक्रवार से ही पर्दे लगाना शुरू कर दिए जाते थे और सोमवार दोपहर तक हटते थे। इससे सैलानियों को जलमहल भी नहीं दिख पाता था।
प्लान धरातल पर उतरा ही नहीं
कई बैठकों और लंबी चर्चा के बाद वर्ष 2018 में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शहर का पहला नाइट बाजार चौड़ा रास्ता में लगाने का प्लान बनाया गया। गोवा की तर्ज पर इसे विकसित करना था, लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध को देखते हुए प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला गया।
जी-20 समिट के चलते नाइट बाजार को बंद कराया गया था। अभी तक एनजीटी का आदेश नहीं मिला है। मानसागर की पाल इको सेंसिटिव जोन में आती है। कलक्टर की अध्यक्षता में बनी कमेटी से अनुमति लेने के बाद ही नाइट बाजार शुरू किया जाएगा।
-आशीष गर्ग, एक्सईएन, मुख्यालय , हैरिटेज नगर निगम