15 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

क्या निर्जला एकादशी में बिल्कुल पानी नहीं पीना चाहिए? ये हैं निर्जला एकादशी व्रत के नियम और कथा

Nirjala Ekadashi 2018 : क्या निर्जला एकादशी में बिल्कुल पानी नहीं पीना चाहिए? व्रत को कर भीम भी हो गए थे बेहोश, जानें फिर क्या हुआ  

2 min read
Google source verification

जयपुर

image

rohit sharma

Jun 22, 2018

Nirjala Ekadashi 2018 Date

Nirjala Ekadashi 2018 Date

जयपुर।

ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी कहते हैं। इस बार निर्जला एकादशी 23 जून 2018 यानी कल है। पूरे देश में मनाई जाने वाली इस एकादशी का अपना एक अलग ही महत्व है। पौराणिक कथाओं में उल्लेख मिलता है कि भीम जो एक शूरवीर योद्धा था ने केवल यही एकादशी करके सारी एकादशियों का फल प्राप्त किया था।

निर्जला एकादशी के व्रत में बहुत ही नियम से रहना पड़ता है। जैसा की नाम से ही पता लगता है निर्जला यानि बिना जल के। निर्जला एकादशी में जल का पीना तक मना है। बताया जाता है की इस व्रत में जल पीने से व्रत टूट जाता है। व्रत के पौराणिक नियम अनुसार सूर्योदय से लेकर अगले दिन के सूर्योदय तक जल का त्याग करना होता है।


निर्जला एकादशी की एक कथा प्रचलित है -

एक समय की बात है। महर्षि व्यास से भीम ने कहा - हे भगवन! युधिष्ठिर, अर्जुन, नकुल, सहदेव, माता कुन्ती और द्रौपदी, सभी एकादशी का व्रत करते हैं और मुझसे भी व्रत करने को कहते हैं, लेकिन मैं तो बिना कुछ खाए रह नहीं सकता हूँ। मुझे आप ऐसा व्रत बताइए, जिसे मैं कर सकूं और जिससे मुझे स्वर्ग की प्राप्ति भी हो सके।

Read More: निर्जला एकादशी 2018 : व्रत के दौरान इन बातो विशेष ध्यान रखने से मिलेंगे चमत्कारी फायदे

तब व्यास जी ने कहा - तुम ज्येष्ठ मास में शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी का व्रत करो। श्री कृष्ण ने मुझे इस बारे में बताया था। इस व्रत को करने से तुम्हें वर्ष में आने वाली सभी एकादशियों का फल प्राप्त होगा और सुख, यश प्राप्त करने के बाद स्वर्ग भी मिलेगा।'

व्यास जी की बात सुन भीम ने भी इस निर्जला एकादशी का व्रत किया, लेकिन इस कठिन व्रत के कारण सुबह होने तक वह बेहोश हो गए। फिर पांडव उन्हें होश में लाए। भीम ने यह व्रत अगले दिन पूरा किया उन्होंने द्वादशी को स्नान कर भगवान केशव की पूजा की और एकादशी का व्रत पूरा किया। इस कारण से इसे भीमसेन एकादशी भी कहा जाता है।

ये हैं निर्जला एकादशी व्रत के नियम

1. निर्जला एकादशी ज्येष्ठ माह में होती है और इस माह में भयंकर गर्मी पड़ती है। इस वजह से पानी भी न पीने के कारण यह व्रत मुश्किल माना जाता है।

2. निर्जला एकादशी व्रत के व्रत को अगले दिन द्वादशी तिथि को सूर्योदय के पश्चात् ही खोला जाता है। जिसके कारण इस व्रत की अवधि काफी लंबी हो जाती है।

3. निर्जला एकादशी का व्रत पूरी तरह निराहार और निर्जला रखा जाता है। इस व्रत में कुछ भी खाया-पीया (यहां तक कि पानी भी नहीं) नहीं जाता। इसलिए यह व्रत बहुत कठिन होता है।

4. इस व्रत को 24 घंटे से भी अधिक देर तक रखा जाता है यानी यह व्रत एकादशी तिथि के प्रारंभ होने के साथ ही प्रारंभ होता है और द्वादशी तिथि के प्रारंभ होने पर ही खत्म होता है।