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केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेसवे का किया निरीक्षण

कई खासियतें हैं एक्सप्रेस वे की, अभी छह लेन का, दस लेन तक हो सकेगा एक्सटेंशन

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केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेसवे का किया निरीक्षण

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेसवे का किया निरीक्षण

जयपुर। केंद्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार को भारतमाला परियोजना के तहत बन रहे अमृतसर जामनगर ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के प्रथम चरण का हवाई निरीक्षण किया।
इस दौरान गडकरी ने अधिकारियों से निर्माण कार्य से संबंधित जानकारियां ली। 22,500 करोड़ रुपए की लागत से अमृतसर से जामनगर को जोड़ने वाला 917 किलोमीटर लंबा ये ग्रीनफील्ड 6-लेन एक्सेस कंट्रोल्ड कॉरिडोर उत्तरी और मध्य भारत के बीच बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करने और आयात-निर्यात की गतिविधियों को सरल बनाएगा।
राजस्थान में प्रोजेक्ट की लागत 15000 करोड़
राजस्थान में 15000 करोड़ रुपए की लागत से बन रहे 637 किमी लंबे 6-लेन इकोनॉमिक एक्सप्रेस वे का करीब 93 फीसदी काम पूरा हो चुका है। ये कॉरिडोर पंजाब में 155 किमी और गुजरात में 125 किमी में बन रहा है।

अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेसवे की खासियत
22500 करोड़ की लागत : भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत बन रहे अमृतसर जामनगर एक्सप्रेसवे की कुल लागत 22500 करोड़ है। 1224 किलोमीटर की लंबाई में 917 किलोमीटर ग्रीन फील्ड कोरिडोर का क्षेत्र शामिल होगा। एनएचएआई के अनुसार 6 लेन ग्रीन कोरिडोर को भविष्य में 10 लेन करने का विकल्प रहेगा। इस कोरिडोर में 100 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से वाहन चला सकेंगे।
आर्थिक विकास को बढ़ावा— इस कोरिडोर के निर्माण से देश में आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा, जिससे इसको बनाने का मुख्य उद्देश्य पूरा होगा। जामनगर से अमृतसर की 23 घंटे की दूरी अब 12 घंटे में तय होगी। चार राज्यों के 15 जिलों को जोड़ने वाले इस कोरिडोर से कांडला पोर्ट पर जम्मू, पंजाब, हरियाणा राजस्थान से गुजरात सीधे जुड़ेगा। इससे आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इस कोरिडोर में 7 बंदरगाह, 11 आर्थिक केंद्र, नौ प्रमुख हवाई अड्डों के साथ ही क्षेत्र में आने वाले पर्यटन स्थल को भी बढ़ावा मिलेगा। कोरिडोर में 32 सड़क, ट्रॉमा केंद्र के अलावा 5 जी नेटवर्क केबल सिस्टम और चार थर्मल पॉवर प्लांट शामिल है।

इसलिए महत्वपूर्ण है राजस्थान के लिए
इस कोरिडोर को राजस्थान के लिए काफी महत्वपूर्ण बताया जा रहा है, क्योंकि बाड़मेर रिफाइनरी भी इससे जुड़ेगी। वहीं, सूरतगढ़ थर्मल पावर प्लांट भी इससे जुड़ेगा।


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