डेढ़ वर्ष के बाद जल संकट के समाधान के लिए नसीराबाद से फिर भीलवाड़ा पहुंची वाटर ट्रेन का तीसरा फेरा बजट के फेर में फंस गया है। राज्य सरकार की ओर से अब तक वाटर ट्रेन का भाड़ा नहीं देने से पहले दो फेरे के लिए करीब दस लाख रुपए ढीले कर चुका जलदाय विभाग तीसरी किस्त के नाम से ही हांफने लगा है। दूसरी तरफ विभाग ने सोमवार तड़के भीलवाड़ा पर पहुंची वाटर ट्रेन के 50 वैगन में से 20 वैगन में लीकेज होने की शिकायत देते हुए रेलवे की परेशानी बढ़ा दी है।
सरकार वस्त्रनगरी को बीसलपुर का पानी मुफ्त में दे रही है, लेकिन जलदाय विभाग को नसीराबाद से पानी लाने का भाड़ा चुकाना था। सरकार द्वारा रेल भाड़ा देने के निर्णय से जलदाय विभाग की जेब ढीली होने से बच गई है, लेकिन घोषणा के अनुरूप राज्य सरकार से वाटर ट्रेन का भाड़ा नहीं मिलने से जलदाय विभाग की आर्थिक स्थिति डांवाडोल हो रही है।
हाथ खींचे
बीसलपुर का पानी वाटर ट्रेन के जरिए भीलवाड़ा लाने के लिए जलदाय विभाग को प्रति फेरे के चार लाख 71 हजार रुपए चुकाने होंगे। जलदाय विभाग दो फेरे के लिए नौ लाख 42 हजार रुपए रेलवे को जमा करवा चुका है, लेकिन यह राशि अब तक राज्य सरकार ने जलदाय विभाग के खाते में स्थानांतरित नहीं की है। ऐसे में तीसरे फेरे के लिए राशि जमा कराने से विभाग हाथ खींच लिए हैं। हालांकि 22 जनवरी तक ये राशि मिलने की उम्मीद है।
कोटा में हुई थी जांच
रेलवे प्रशासन का मानना है कि सभी वैगन के वॉल्व ठीक है और कोई बड़ा लीकेज नहीं है। इसके बावजूद नसीराबाद में तकनीकी टीम से वैगन की जांच करवा ली गई है। हालांकि भीलवाड़ा के लिए पानी का पहला फेरा ले जाने से पूर्व सभी 50 वैगनों की जांच कोटा में करवा ली गई थी। वैगनों को क्लीन चिट मिलने के बाद ही इनमें पानी भरा गया। एक वैगन की क्षमता 50 हजार लीटर पानी है। वाटर ट्रेन के 50 वैगन के जरिए सोमवार को पहली खेप में 25 लाख लीटर पानी पहुंचा है। जलदाय विभाग अभी दो ट्रिप के लिए रेल भाड़ा जमा करवा चुका है। इसमें से एक ट्रिप डिमाण्ड के आधार पर भीलवाड़ा पहुंच गई है, जबकि दूसरे ट्रिप के लिए जलदाय विभाग ने अभी डिमाण्ड नोट नहीं दिया है।