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पेयजल योजना के लिए बजट की नहीं कमी

केन्द्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज और पेयजल मंत्री चौ. बीरेन्द्र सिंह ने कहा कि राजस्थान को फ्लोराइड युक्त जल से निजात दिलाने, पेयजल समस्या समाधान के लिए बजट की कमी नहीं है।

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केन्द्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज और पेयजल मंत्री चौ. बीरेन्द्र सिंह ने कहा कि राजस्थान को फ्लोराइड युक्त जल से निजात दिलाने, पेयजल समस्या समाधान के लिए बजट की कमी नहीं है। राज्य सरकार ने 23 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट तैयार किए हैं, उन्हें राज्य सरकार की प्राथमिकता के आधार पर केन्द्र सरकार के स्तर और विदेशी फंड की मदद उपलब्ध कराकर लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अजमेर को चंबल का पानी या इंदिरा गांधी नहर का पानी पहुंचाने के लिए राज्य सरकार प्रस्ताव देगी तो उस पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। गुरुवार को एक दिवसीय निजी यात्रा पर अजमेर आए चौधरी ने सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में यह बात कही।

उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार ने 23 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट तैयार किए हैं। उन्हें पूरा करने के लिए सरकार वल्र्ड बैंक, जायका, एशियन बैंक के माध्यम से मदद दिलाने में मदद करेगी। उन्होंने बताया कि फ्लोराइड युक्त जल से निजात दिलाने के लिए नीति आयोग ने एक हजार करोड़ रुपए का बजट दिया है। राजस्थान में फ्लोराइड युक्त जल की समस्या समाधान के लिए 331 करोड़ रुपए दिए हैं। दो सौ करोड़ रुपए और भी राजस्थान को मिलेंगे।

उन्होंने बताया कि अभी देश में पेयजल की 85 प्रतिशत आपूर्ति भूमिगत जल से होती है, जबकि नहर, झील, नदी, तालाब से मात्र 15 प्रतिशत ही आपूर्ति हो रही है। सरकार ने निर्णय किया है कि वर्ष 2022 तक हम ऐसा प्रयास करेंगे कि 85 प्रतिशत पेयजल आपूर्ति सरफेस वाटर से हो, भूमिगत जल का उपयोग 15 प्रतिशत होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजस्थान को साधनों की कमी नहीं होने देंगे।

मानव दिवस को प्राथमिकता
उन्होंने कहा कि अब तक 230 करोड़ मानव दिवस का लक्ष्य था, उसे 160 करोड़ कर चुके है। राजस्थान में 21 करोड़ में से 16 करोड़ 40 लाख मानव दिवस काम हुए हैं। 2 हजार 455 करोड़ रुपए राजस्थान में दिया गया है, वह बंट चुका है। 400 करोड़ का बजट जल्द दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसी प्रदेश में कृषि कार्य की मजदूरी मनरेगा से ज्यादा है, किसी प्रदेश में कम है। जहां कृषि कार्य में ज्यादा पैसा मिलता है, वहां लोग मनरेगा में काम नहीं करते। सरकार का प्रयास है कि श्रमिकों प्रत्येक राज्य में महात्मा गांधी नरेगा श्रमिक की मजदूरी और कृषि संबंधित कार्यों की मजदूरी समान हो। देश में 11 ऐसे राज्य हैं, जहां महात्मा गांधी नरेगा से ज्यादा मजदूरी कृषि कार्य पर मिलती है।

मस्टरोल और जॉब कार्ड को आधार कार्ड से जोडऩे का प्रयास किया जा रहा है। आधार कार्ड से जोडऩे के बाद फर्जी उपस्थिति की आशंका कम हो जाएगी। जब भी मस्टरोल बनेगा, वैसे ही हमारे पास सूचना आएगी। काम की सूचना मिलते ही श्रमिक को 24 घंटे में मजदूरी दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन में शौचालय निर्माण के लिए बजट की कमी नहीं है। यदि कहीं बजट की कमी है तो सरकार जल्द जारी करेगी।

सड़क गुणवत्ता में राजस्थान आगे
केन्द्रीय मंत्री चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना में राजस्थान का काम बेहतर है। राजस्थान में एक किलोमीटर सड़क के निर्माण पर 35 से 40 लाख रुपए ही लगते हैं, जबकि दूसरे प्रदेशों में एक करोड़ रुपए तक खर्च आता है। राजस्थान को 509 करोड़ में से 387 करोड़ का बजट दे दिया गया है। 339 करोड़ रुपए राज्य सरकार को देने हैं।