
जयपुर. तंबाकू चाहे चबा कर खाया जाए या फिर धूम्रपान के रूप में, नुकसान पहुंचाता ही है। धूम्रपान करने वाले सिर्फ शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी बीमार होते जाते हैं। दरअसल निकोटिन सीधे दिमाग पर असर करता है। नियमित तौर पर किया गया धूम्रपान दिमाग में कई ऐसे बदलाव कर देता है, जो स्मोकिंग से दूरी नहीं बनाने देते हैं।
कई शोध मानते हैं कि स्मोकिंग असल में रिलेक्स नहीं करती है, बल्कि ये तनाव और एंग्जाइटी बढ़ाने की वजह जरूर बन जाती है। दरअसल स्मोकिंग तुरंत रिलेक्स होने का अहसास कराती है, जिससे लगता है कि तनाव और एंग्जाइटी कम हो रहे हैं। लेकिन ऐसा होता नहीं है। रिलेक्स होने की फीलिंग जल्द ही खत्म हो जाती है और फिर से स्मोकिंग करने को दिल मचलने लगता है। इस स्थिति में चिड़चिड़ापन घेर लेता है और इसे खत्म करने के लिए लोग स्मोकिंग करते हैं। पर तनाव तो घटने की बजाए बढ़ रहा होता है। एक शोध में पाया गया है कि अवसाद में स्मोकिंग करने वालों की संख्या उन लोगों की तुलना में दोगुनी है, जिनको अवसाद बिलकुल नहीं है।
सिगरेट में मौजूद निकोटिन का प्रभाव शरीर में सिर्फ 40 मिनट तक रहता है। यह असर खत्म होते ही फिर तलब उठने लगती है। नशे के स्तर को बनाये रखने के लिए व्यक्ति बार-बार धूम्रपान करता है।
तंबाकू छोडऩे के फायदे-
- तंबाकू छोडऩे के फायदे भी बहुत हैं। विश्व स्वास्थ संगठन के अनुसार, इसे गुटखा-तंबाकू छोडऩे का असर आपकी सेहत पर जल्दी ही दिखने लगता है। सिगरेट छोडऩे के महज 12 घंटे के भीतर रक्त में कार्बन मोनोक्साइड का स्तर घटकर सामान्य स्तर पर आ जाएगा।
- दो से 12 सप्ताह में खून का दौरा सामान्य हो जाएगा और आपके फेफड़े से ठीक से काम करने लगेंगे।
- अगर आपको सांस व खांसने की लंबे समय से शिकायत है तो 1 से 9 महीने के अंदर यह समस्या दूर हो जाएगी।
- कैंसर का खतरा 50 फीसदी कम हो जाएगा।
(डॉ. आर.के. सोलंकी, सीनियर प्रोफेेसर, मनोचिकित्सा विभाग, एसएमएस)
Published on:
31 May 2020 11:39 am
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