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शिक्षकों की बाट जोह रहा नेत्रहीन होनहार छात्रों का विद्यालय

दिव्यांग होने के बावजूद मीनल, अजहरुद्दीन और सिद्धार्थ ने प्रदेश में मेरिट में स्थान बनाकर नाम रोशन किया है।

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Teachers of schools with weak results will now be examined

Teachers of schools with weak results will now be examined

जयपुर। दिव्यांग होने के बावजूद मीनल, अजहरुद्दीन और सिद्धार्थ ने प्रदेश में मेरिट में स्थान बनाकर नाम रोशन किया है। पांच विषयों में डिस्टिंक्शन हो या विज्ञान, गणित और अंग्रेजी जैसे विषयों में 90 फीसदी से ज्यादा अंक लाना, ये महज कुछ उदाहरण हैं कि अगर इन दिव्यांगों को संसाधन और सुविधाएं मिलें तो ये भी सामान्य बच्चों की तरह अपना भविष्य संवार सकते हैं।

शिक्षा विभाग नहीं दे रहा मांगों पर ध्यान
गणगौरी बाजार के लंगर के बालाजी स्थित राजस्थान नेत्रहीन कल्याण संस्थान में इस सत्र में एक भी सरकारी शिक्षक दिव्यांगों के लिए नियुक्त नहीं किया गया है। संस्थान की ओर से इस संबंध में कई बार आवेदन किया जा चुका है लेकिन शिक्षा विभाग इन मांगों पर ध्यान नहीं दे रहा है। संस्थान के साथ ये भेदभाव तब है जब यहां के छात्र बोर्ड परीक्षाओं में मेरिट में स्थान बना रहे हैं।

फिलहाल संस्थान अनुदान की राशि से निजी स्तर पर ही अध्यापक रख यहां पढ़ रहे बच्चों का पाठ्यक्रम पूरा करवाने का काम कर रहे हैं। ऐसा नहीं है कि यहां इससे पहले कोई अध्यापक नियुक्त नहीं था। पिछले सत्र में यहां तीन अध्यापक नियुक्त किए गए थे, लेकिन इस सत्र में इन्हें वापस स्थानान्तरित कर दिया गया।

कोर्ट के निर्देश
उच्च न्यायालय की ओर से भी इस संबंध में विभाग को निर्देश जारी किए गए थे कि नेत्रहीन कल्याण संस्थान में शिक्षकों की नियुक्ति कर स्थानान्तरित स्थान पर वैकल्पिक व्यवस्था विभाग की ओर से ही की जाए। संस्थान की ओर से भी इस संबंध में हाई कोर्ट में याचिका विचाराधीन है।

बच्चे मेरिट में
इस साल आए वार्षिक परिणाम में संस्थान के छह छात्रों ने मेरिट के साथ दो से पांच विषयों में डिस्टिंक्शन भी लाए हैं। इनमें मीनल ने दसवीं कक्षा में छह में से पांच विषयों में डिस्टिंक्शन हासिल की है। ललिता मीणा, सिद्धार्थ शर्मा, अंजली साहू और भारती दांगी ने भी डिस्टिंक्शन के साथ मेरिट में जगह बनाई है।

इसलिए जरूरी
संस्थान के के.एल. शर्मा ने बताया कि सामान्य बच्चों की तुलना में इन दिव्यांग बच्चों को पढ़ाने के लिए लगाव और लगन के साथ ब्रेल शिक्षा में विशेष बी.एड कोर्स की आवश्यकता होती है। जो ब्रेल लिपी में सिलेबस को न केवल पढ़ाए बल्कि उसे समझने और याद करने में भी सहायता करे।

ये आ रही परेशानी
- कोर्स पूरा होने में हो रहा विलम्ब
- योग्य शिक्षकों के अभाव में बच्चों को नहीं मिल रही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
- दिव्यांग छात्रों और अध्यापकों के बीच कम्यूनिकेशन गैप
- मेरिट में आए बच्चों की परफॉर्मेंस हो रही प्रभावित