एक ओर जहां प्रदेश में मूक पशुओं का इलाज निशुल्क कर दिया गया है तो वहीं दूसरी ओर पशु पालन विभाग में 10 साल से एक भी स्थाई वेटरनरी डॉक्टर की नियुक्ति नहीं की गई है, नतीजा विभाग में पशु चिकित्सकों के आधे से अधिक पद रिक्त चल रहे हैं। अब जबकि विभाग पशु मित्र योजना के तहत पशु धन सहायकों के साथ पशु चिकित्सकों को लगाने जा रहा है तो भी इनकी नियुक्ति संविदा पर ही की जानी है। यानी विभाग संविदाकर्मियों के भरोसे अपनी विभिन्न योजनाओं का संचालन करेगा। योजना के तहत 5000 पदों पर बेरोजगार युवाओं को अल्प मानदेय पर नियुक्ति दी जाएगी।
10 साल से स्थाई नियुक्ति नहीं
गौरतलब है कि विभाग में आखिरी बार पशु चिकित्सकों की भर्ती 2013 में की गई थी,इसके बाद से अब तक विभाग में पशु चिकित्सकों की भर्ती नहीं हो पाई है। 2019 में 900 पदों पर शुरू की गई भर्ती की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो सकी है। वर्तमान में िवभाग में पशुचिकित्सा अधिकारी के 2243 में से 1352 खाली चल रहे हैं। गत वर्ष विभाग ने 500 पशुधन सहायकों और पशु चिकित्सकों को नियुक्ति दी थी लेकिन यह नियुक्ति भी यूटीबी पर दी गई थी जिससे लम्पी से बचाव में मदद मिल सके।
सारे काम होंगे इनके जिम्मे
पशु मित्र के रूप में काम करने वाले युवाओं को पशुओं का टीकाकरण, टैगिंग और इनाफ पोर्टल पर एंट्री करने के साथ ही घर घर जाकर पशुपालकों से किसान क्रेडिट कार्ड के आवेदन लेने का काम करना होगा। उन्हें विभाग की ओर से लगाए जाने वाले पशु चिकित्सा शिविरों में जरूरत होने पर सहयोग देना होगा साथ ही पशु बीमा के निए स्वास्थ्य प्रमाणपत्र जारी करने का का भी करना पड़ेगा। विभाग की ओर से जल्द ही पशुगणना कार्य शुरू किया जाना है पशुमित्र इसमें भी मदद करेंगे। साथ ही विभागीय योजनाओं का प्रसार प्रचार करने के साथ रोग प्रकोप/आकस्मिक स्थिति में पशु चिकित्सा कार्य में सहयोग करने का काम भी इनके ही जिम्मे होगा।