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सूरत से नहीं लिया कोई सबक, अब कोटा में हुआ बड़ा हादसा, प्रदेश के लाखों बच्चों पर मौत का साया बरकरार

सूरत हादसे के बाद राज्य सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों ने ऐसे हादसों को रोकने के लिए केवल बैठकें लेकर इतिश्री कर ली। हॉस्टलों और कोचिंग सेंटर्स में सुरक्षा इंतजामों को लेकर और ऐसे हालात में स्टूडेंट्स को निपटने के लिए कोई ठोस प्लान नहीं बनाया गया।

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जयपुर

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Abdul Bari

Jun 11, 2019

जयपुर
करीब 20 दिन पहले गुजरात के सूरत मेें कोचिंग सेंटर में हुए आग के भयानक हादसे के बाद भी प्रदेश के हॉस्टल संचालकों और सरकार ने कोई सबक नहीं लिया है। जबकि इस भीषण अग्निकांड में 20 मौतें हो चुकी हैं। प्रदेश में हालात यह हैं कि सोमवार रात कुछ इसी तरह का हादसा कोटा के तलवंडी इलाके में हुआ। गनीमत यह रही कि हादसे में किसी की जान नहीं गई।

सूरत हादसे के बाद राज्य सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों ने ऐसे हादसों को रोकने के लिए केवल बैठकें लेकर इतिश्री कर ली। हॉस्टलों और कोचिंग सेंटर्स में सुरक्षा इंतजामों को लेकर और ऐसे हालात में स्टूडेंट्स को निपटने के लिए कोई ठोस प्लान नहीं बनाया गया। प्रदेशभर में कोचिंग सेंटरों की ऐसी इमारतों को लेकर सवाल गहराने लगे हैं। यह स्थिति लगातार चिंताजनक बनी हुई है।

सोमवार रात इस तरह बचे स्टूडेंट

यहां एक हॉस्टल में भीषण आग लग गई। इस तीन मंजिला हॉस्टल में आग लगने के दौरान करीब 28 बच्चे रह रहे थे। हॉस्टल के एक ही कमरे में पांच विद्यार्थी फंसे हुए थे। आग लगते ही पूरे हॉस्टल में धुआं ही धुंआ हो गया। अचानक हुए हादसे से बच्चे घबरा गए। आग लगने के बाद आसपास के लोग एकत्र हो गए। गनीमत यह रही कि हादसे के दौरान स्थानीय लोगों ने बच्चों को सुरक्षित निकालने के लिए रेस्क्यू करना शुरू कर दिया। पहले बच्चों को समझाया कि वे चिंता न करें और हड़बड़ी में कूदें नहीं। इसके बाद प्रशासन और लोगों ने मिलकर बच्चों का रेस्क्यु कर लिया। धुएं की चपेट में आने वाले दो बच्चों को पुलिस एमबीएस अस्पताल ले गई। वहां से प्राथमिक उपचार के बाद वापस भेज दिया।

कोटा में देर रात तीन मंजिला हॉस्टल में लगी भीषण आग, 28 स्टूडेंट्स फंसे, रेस्क्यू कर निकाला, कोचिंग नगरी में अफरा-तफरी

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लाखों बच्चों की जान रहती है जोखिम में..

प्रदेश में कोटा, जयपुर, अजमेर और जोधपुर सहित अन्य बड़े शहरों में इस तरह के कोचिंग सेंटर धड़ल्ले से नियम विपरीत खड़े हो रहे हैं। ज्यादातर कोचिंग सेंटर ऐसी ही इमारतों में चल रहे हैं, जिससे लाखों बच्चों को जान जोखिम में है।


नियम तो हैं लेकिन पालना नहीं..

कोचिंग सेंटरों को लेकर सरकार ने नियम तो ढ़ेर बना दिए लेकिन इन नियमों की पालना की पालना होती नहीं दिख रही है। हालात यह हैं कि राजधानी में ही प्रशासन कोचिंग संस्थानों से इन नियमों की पालना कराने में असमर्थ नजर आ रहा है।

यह हैं सड़क नियम

कोचिंग सेंटर अब 40 फीट या उससे चौड़ी सड़क व 300 वर्ग मीटर से बड़े भूखण्डों पर खोले जा सकेंगे। हर मंजिल पर प्रवेश व निकासी के लिए दो सीढिय़ा होंगी।

यह हैं फायर नियम

पर्याप्त अग्निशमन यंत्र सुनिश्चित हों।

यह हैं विद्यार्थी नियम

10 से 100 तक विद्यार्थी वाले संस्थानों पर नए नियम लागू होंगे। अधिक विद्यार्थी वालों के लिए पुराने नियम (संस्थानिक) ही लागू रहेंगे।

यह हैं कॉर्नर भूखण्ड नियम

कॉर्नर वाले भूखण्ड पर कोचिंग या ट्यूशन सेंटर खोलने की अनुमति नहीं होगी। क्योंकि कॉर्नर के भूखण्डों पर जंक्शन के कारण दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।


यह हैं पार्किंग नियम

प्रत्येक अभ्यर्थी पर एक इसीयू जरूरी। कुल इसीयू का 25 प्रतिशत पार्किंग चौपहिया व 75 प्रतिशत दोपहिया के लिए।


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