
Rajasthan Politics : मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की टेंशन कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। एक परेशानी खत्म होती है तो दूसरी शुरू हो जाती है। दोराहे पर खड़ी कांग्रेस के लिए मुश्किलें कतार लगाए पड़ी हैं। सचिन पायलट के बाद अब अशोक गहलोत के लिए निर्दलीय 13 विधायक और बसपा को छोड़कर आए छह विधायक चुनाव से पहले संकट बढ़ा रहे हैं। इसमें से अधिकतर कांग्रेस के कार्यकर्ता रहे हैं। यह विधानसभा टिकट की मांग जब करेंगे तो फिर टकराव बढ़ने के पूरे आसार हैं।
कुश्ती शुरू
चुनाव के पहले से इन 19 विधानसभा क्षेत्रों में पूर्व कांग्रेस प्रत्याशियों और विधायकों के बीच कुश्ती शुरू हो गई है। इन 19 सीटों पर कांग्रेस के प्रत्याशी रहे नेताओं ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय आ प्रदेश प्रभारी सुखजिन्दर सिंह रंधावा के समक्ष अपनी पीड़ा जाहिर की थी। उन्होंने कहा कि विधायकों को ज्यादा तवज्जों दे रही। इन लोगों ने ही कांग्रेसी नेताओं को हराया था।
अशोक गहलोत अभिभावक
कांग्रेस जुलाई 2020 में संकट में फंस गई थी। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ ये 19 विधायक डटे रहे। उस समय मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उनका धन्यवाद करते हुए कहा था कि वह यह एहसान कभी नहीं भूल सकते। उस समय गहलोत ने वादा किया था कि वे सभी के अभिभावक के रूप में काम करेंगे। वह हमेशा उनका ध्यान रखेंगे।
ये हैं निर्दलीय विधायक
रामकेश मीणा, रमिला खड़िया, खुशवीर सिंह जोजावर, संयम लोढ़ा, बाबूलाल नागर, बलजीत यादव,महादेव सिंह खंडेला, आलोक बेनीवाल, लक्ष्मण मीणा, ओमप्रकाश हुड़ला, राजकुमार गौड़, कांति प्रसाद मीणा और सुरेश टाक शामिल हैं। ओमप्रकाश हुड़ला और सुरेश टाक को छोड़ बाकी सभी विधायक कांग्रेस के पुराने नेता हैं।
ये थे बसपा के विधायक
बसपा के छह प्रत्याशियों ने जीत हासिल की थी। जोगेन्द्र सिंह अवाना, लाखन मीणा, संदीप यादव राजेन्द्र सिंह गुढ़ा, दीपचंद खेरिया, और वाजिब अली विधायक बने। इन सभी विधायकों पर अशोक गहलोत खूब मेहरबान रही। संयम लोढा और बाबूलाल नागर मुख्यमंत्री के सलाहकार हैं। राजेन्द्र सिंह गुढ़ा इस समय राज्यमंत्री हैं और अन्य को विभिन्न बोर्ड में एडजेस्ट किया गया है।
Published on:
25 Apr 2023 03:51 pm
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