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मालवीया के बाद अब रिछपाल मिर्धा के बगावती तेवरों ने बढ़ाई कांग्रेस की परेशानी

- मिर्धा ने पार्टी में जनाधार वाले नेताओं की उपेक्षा के आरोप लगाए

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जयपुर। लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के कई नेताओं के पाला बदलने की चर्चाएं चल रही हैं। दिग्गज आदिवासी नेता महेंद्रजीत सिंह मालवीया के बाद पूर्व विधायक रिछपाल मिर्धा और उनके पुत्र विजयपाल मिर्धा की भी पार्टी छोड़ने की अकटलें चल रही हैं। इस बीच पार्टी में जनाधार वाले नेताओं की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए मिर्धा ने इसके संकेत भी दिए हैं। रिछपाल मिर्धा पूर्व मंत्री लालचंद कटारिया के समधी भी हैं।


मिर्धा का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वे ये कहते दिख रहे हैं कि कांग्रेस में जनाधार वाले नेताओं के लिए जगह नहीं हैं। चापलूसी करने वालों को पार्टी में आगे बढ़ाया जाता है। मेरे जैसे नेता को संगठन में कोई पद नहीं दिया गया। हमारा परिवार 50 साल से कांग्रेस में हैं। अब परिवार के बीच बैठकर तय करेंगे कि किस पार्टी में जाना है। वीडियो में मिर्धा ने अपने चचेरे भाई और नागौर से कांग्रेस विधायक हरेंद्र मिर्धा पर भी निशाना साधते हुए कह रहे हैं कि उनकी राजनीतिक जमीन नहीं बची है।

भतीजी ने विधानसभा चुनाव से पहली छोड़ी थी कांग्रेस
इससे पहले रिछपाल मिर्धा की भतीजी और पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा ने भी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था। भाजपा ने उन्हें नागौर से टिकट देकर चुनाव मैदान में उतारा था, लेकिन उन्हें अपने चाचा हरेंद्र मिर्धा के सामने हार का सामना करना पड़ा।

चार बार विधायक रहे रिछपाल मिर्धा
रिछपाल मिर्धा 1990 में जनता दल, 1993 में कांग्रेस, 1998 में निर्दलीय, 2003 में कांग्रेस से विधायक रहे हैं। 2018 में उनके पुत्र विजय पाल मिर्धा डेगाना से विधायक चुने गए थे। इस बार चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

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