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पेपर लीक पर अब होगी उम्र कैद की सजा, संशोधन विधेयक लाएगी गहलोत सरकार

-मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ट्वीट करके आगामी विधानसभा सत्र में संशोधन विधायक लाने के दिए संकेत, इसी साल बजट सत्र में पारित किया गया था नकल विरोधी कानून, मौजूदा कानून में पेपर लीक करने वाले व्यक्ति को 5 से 10 साल की सजा और 10 लाख से 10 करोड़ के अर्थदंड का है प्रावधान

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जयपुर। प्रदेश में नकल विरोधी कानून लागू होने के बावजूद भी पेपर लीक होने को लेकर विपक्ष के निशाने पर आई गहलोत सरकार अब विधानसभा चुनाव को देखते हुए नकल विरोधी कानून में और कड़े प्रावधान करने जा रही है। पेपर लीक वाले व्यक्ति को उम्रकैद की सजा का प्रावधान नकल विरोधी कानून में जोड़ा जाएगा। इसके लिए सरकार आगामी विधानसभा सत्र में संशोधन विधेयक लेकर आएगी, इसे लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी मंगलवार को ट्वीट करके इसके संकेत दिए हैं।

साथ ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मुख्य सचिव को भी आरपीएससी, डीओपी और कर्मचारी चयन बोर्ड के साथ चर्चा कर बेहतर प्रक्रिया तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इधर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ओर से पेपर लीक करने वालों के खिलाफ उम्र कैद की सजा का प्रावधान का बिल लाए जाने की घोषणा को पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट की डिमांड से भी जोड़कर देखा जा रहा है। सचिन पायलट ने जो तीन प्रमुख डिमांड रखी हैं उनमें से एक पेपर लीक करने वालों के खिलाफ कड़ी से कड़ी सजा का प्रावधान भी है।

बजट सत्र में पारित हुआ था नकल विरोधी बिल
दरअसल पेपर लीक मामलों की पर रोकथाम और आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई करने के लिए गहलोत सरकार ने इसी साल बजट सत्र में राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम के उपाय) विधेयक- 2022 पारित कराया था।

मौजूदा कानून में ये है सजा का प्रावधान
दरअसल मौजूदा नकल विरोधी कानून में पेपर लीक करने वाले व्यक्तियों को 5 से 10 साल का कारावास और 10 लाख से 10 करोड़ का अर्थ दंड दिए जाने का प्रावधान है। इसके साथ ही संपत्ति को जब्त करने और कुर्क करने जैसे प्रावधान भी कानून में मौजूद हैं। वहीं परीक्षा अनुचित साधनो का प्रयोग करने वाले परीक्षार्थी का अपराध साबित होने पर 3 साल की सजा और एक लाख रुपए अर्थदंड का प्रावधान है।

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