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Indian Railway Fare Hike: उत्तर पश्चिम रेलवे 150 ट्रेनों में गुपचुप वसूल रहा है तीन गुना किराया

भारतीय रेलवे (Indian Railway) धड़ाधड़ वंदे भारत (Vandebharat) ट्रेन (Train) चलाकर अमीरों में देश में देशभक्ति (Nation Pride) की अलख जगा रहा है तो वहीं दूसरी तरफ पैसेंजर ट्रेनों (Train) से एक्सप्रेस का किराया (fare) वसूल गरीबों की जेब जला रहा है। कोरोना (Corona) खत्म हो गया लेकिन कोरोना काल में बढ़ाया गया किराया रेलवे ने अब तक ही वापस नहीं लिया है। इस पर भी तुर्रा यह कि वह सिर्फ लागत का 57 फीसदी ही किराया लोगों से ले रहा है।

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भारतीय रेलवे (Indian Railway) धड़ाधड़ वंदे भारत( Vandebharat) ट्रेन (Train) चलाकर अमीरों में देश में देशभक्ति (Nation Pride) की अलख जगा रहा है तो वहीं दूसरी तरफ पैसेंजर ट्रेनों (Train) से एक्सप्रेस का किराया (fare) वसूल गरीबों की जेब जला रहा है। कोरोना (Corona) खत्म हो गया लेकिन कोरोना काल में बढ़ाया गया किराया रेलवे ने अब तक ही वापस नहीं लिया है। इस पर भी तुर्रा यह कि वह सिर्फ लागत का 57 फीसदी ही किराया लोगों से ले रहा है।

राजस्थान में हर दिन 1.5 लाख यात्रियों से वसूली
रेलवे की यह वसूली चुपचाप जारी है लेकिन किसी के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। आज भी कई कई पैसेंजर ट्रेनों में अभी भी एक्सप्रेस ट्रेनों को किराया वसूला जा रहा है। इससे पश्चिम रेलवे में प्रतिदिन 1.5 लाख से ज्यादा यात्रियों की जेब पर भार पड़ रहा है।

भीड़ नियंत्रण के नाम पर भर रहा जेब
रेलवे ने यह तरीका भीड़ नियंत्रण के नाम पर अपनाया था। भीड़ नियंत्रण करने के लिए पैसेंजर ट्रेनों के नंबर में बदलाव कर स्पेशल बना दिया। इससे न्यूनतम किराया 10 रुपए से बढ़कर 30 रुपए हो गया था। तब से अब तक इन ट्रेनों को सामान्य नहीं बनाया गया है।

उत्तर पश्चिम रेलवे में ही 150 ट्रेने
उत्तर पश्चिम रेलवे में 150 से ज्यादा पैसेंजर ट्रेन संचालित हो रही है। इन ट्रेनों के सामान्य कोच में रोजाना 1.5 लाख से ज्यादा यात्री सफर करते हैं। इसका सबसे ज्यादा बोझ दैनिक यात्रियों पर ही पड़ रहा है।

उत्तर पश्चिम रेलवे करेगा समीक्षा
दीपावली पर लोगों का दिल और जेब जला रहा उत्तर पश्चिम रेलवे अब आगे का वायदा कर रहा है। उत्तर पश्चिम रेलवे का कहा है कि त्यौहार चल रहा है तो आवाजाही ज्यादा होगी। ऐसे में जल्द ही समीक्षा की जाएगी।

शिकायत पर कोई सुनवाई नहीं

पैसेंजर ट्रेनों में ज्यादातर कमजोर वर्ग के लोग सफर करते हैं। रेलवे उनसे कमाई में जुटा है। कई बार शिकायत भी कर चुके लेकिन इस मामले में अभी तक कोई सुनवाई नहीं हो रही। रेलवे को न्यूनतम किराया पहले की तरह लागू करना चाहिए।
-अशोक वासदेव, अध्यक्ष, दैनिक यात्री संघ एकीकृत