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Rajasthan: स्कूलों में लगेगा ऑयल और शुगर बोर्ड, कैंटीन में नहीं दिख रहा असर

शहर के कई निजी स्कूलों में भले ही गाइडलाइन के अनुसार बोर्ड लगाए गए हैं, लेकिन स्कूल कैंटीनों में अभी भी हाई ऑयल और हाई शुगर युक्त स्नैक्स धड़ल्ले से बेचे जा रहे हैं।

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CBSE

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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए स्कूलों में 'ऑयल बोर्ड' लगाने की नई गाइडलाइन जारी की है। इस बोर्ड के माध्यम से बच्चों को तेलिया यानी ऑयल वाले खाने के दुष्प्रभावों से अवगत कराया जाएगा।

इससे पहले बोर्ड ने 'शुगर बोर्ड' लगाने की गाइडलाइन की थी, जिससे बच्चों को अधिक चीनी वाले उत्पादों से बचाया जा सके। लेकिन पत्रिका के पड़ताल में यह सामने आया कि शुगर बोर्ड तो कुछ ही स्कूलों में लगाया गया और पालन भी नहीं हुआ। शहर के ज्यादातर निजी स्कूलों में चिप्स, फास्टफूड, चॉकलेट्स कैंटीनों में बिक रहे हैं। गौर करने वाली बात है कि जिन चीजों का खाना गलत बताया जा रहा है उसी को स्कूल के कैंटीनों में बेचा जा रहा है।

जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग

शहर के कई निजी स्कूलों में भले ही गाइडलाइन के अनुसार बोर्ड लगाए गए हैं, लेकिन स्कूल कैंटीनों में अभी भी हाई ऑयल और हाई शुगर युक्त स्नैक्स धड़ल्ले से बेचे जा रहे हैं। समोसे, आलू टिक्की, पिज्जा, कोल्ड ड्रिंक और पैकेज्ड चिप्स जैसी चीजें बच्चों को आसानी से मिल रही हैं।

जिस कारण बच्चे उससे से प्रभावित हो कर उन चीजों का सेवन कर रहे हैं। अभिभावकों और हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार केवल बोर्ड लगाना काफी नहीं है। कैंटीन की क्वालिटी, मेन्यू पर सख्त निगरानी जरूरी है। बच्चों की डाइट और खाने की आदतों पर भी स्कूल प्रशासन को ध्यान देना होगा।

शहर के कई स्कूलों में अभी तक नहीं लगा शुगर बोर्ड

पड़ताल के दौरान यह भी सामने आया कि शहर के कई निजी सीबीएसई स्कूलों में गाइडलाइन जारी होने के बाद भी अभी तक शुगर बोर्ड नहीं लगाया गया। शहर के अलग अलग सीबीएसई के स्कूल में पढ़ रहे बच्चों का कहना था कि उनके स्कूल में कोई भी शुगर बोर्ड नहीं लगाया गया। साथ ही कैंटीनों में कोलड्रिंक, चॉकलेट्स से लेकर कई तरह के शुगर युक्त पदार्थ मिल रहे हैं।

मैं एक निजी सीबीएसई स्कूल में पढ़ता हूं। हमारे स्कूल में पिज्जा, चिप्स, बर्गर, चॉकलेट के साथ कई तरह के फास्टफूड मिलते है। हमारे स्कूल में तो शुगर बोर्ड भी नहीं लगा हैं। कैंटीन में हर तरह के फास्टफूड आसानी से मिल जाते हैं।

आदित्य सोनी (प्रवर्तित नाम), छात्र

अगर घर में बेहतर खाना मिल भी रहा है लेकिन बच्चा स्कूल के कैंटीन में भी जंक फूड खाता है तो कही न कही बच्चे के हेल्थ पर इसका असर पड़ेगा। गाइडलाइन को सिर्फ बोर्ड तक ही सीमित न करे बल्कि धरातल पर उतरना जरूरी है।

डॉ. मेधावी गौतम, डायटिशियन

जंक फूड स्कूलों के कैंटीन में बेची जा रही हैं। बोर्ड लगाना सिर्फ दिखावे की बात है, जब तक स्कूल के कैंटीन में बिकने वाले जंक फूड को नहीं रोका जाएगा, तब तक बदलाव नहीं आएगा।

मीरा सिंह, अभिभावक