मोहित शर्मा/ जयपुर।
छात्रसंघ चुनाव में पुरानी स्याही से तय की जा रही छात्रसंघ की नई सरकार। आज प्रदेशभर में चल रहे छात्रसंघ चुनावों में एक नई गफलत सामने आई। कॉमर्स कॉलेज में मतदाताओं के हाथों में स्यायी एक्सपायरी डेट की काम में ली जा रही थी। संवाददाता ने जब इस बारे में वहां बैठे स्टॉफ और प्रिंसिपल से पूछा तो वे बगले झांकने लगे। मतदाताओं की अंगुलियों पर करीब 2 साल 7 महीने पुरानी स्याही विद्यार्थियों की अंगुली पर लगाई है। जानकारों की माने तो यह स्याही जल्द ही मिट सकती है।
स्याही कर्नाटक से आई बताई गई है। स्याही की प्लास्टिक की बोतल पर मैन्यूफैक्चरिंग डेट जुलाई 2015 और एक्सपायरी डेट जनवरी 2016 बता रही है। मतदाताओं का कहना है कि स्याही एक्सपायरी डेट की काम में लेना गलत है। इससे विद्यार्थियों की अंगुली को तो नुकसान हो ही सकता है साथ ही यह जल्दी मिट भी सकती है।
फर्जी मतदान की आशंका
कई छात्रों ने बताया कि पुरानी स्याही उनकी अंगुली पर लगाने पर मिट रही है। ऐसे में उन्होंने फर्जी मतदान की भी आशंका जताई।
इनका कहना है
स्याही के बारे में हम कुछ नहीं कह सकते इसके बारे में तो विश्वविद्यालय ही बता सकता है।
कॉमर्स कॉलेज के जे.पी.यादव, प्रिंसिपल, कॉमर्स कॉलेज
स्याही के बारे में वे कुछ भी नहीं बता सकती। अंगुली पर लगाने वाली स्याही जिला कलक्ट्रेट से मिली है।
सरीना कालिया,छात्र कल्याण अधिष्ठाता, राजस्थान विश्वविद्यालय
स्याही निर्वाचन आयोग ने नहीं दी है। निर्वाचन आयोग तो चुनाव होते ही स्याही वापस भेज देता है।
विनोद पारीक, उपमुख्य निर्वाचन अधिकारी, निर्वाचन विभाग
हमसे स्याही मांगी थी, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन को हमने स्याही नहीं दी है।
अशोक जैन, उपसचिव, राज्य निर्वाचन आयोग
स्याही कहां से आई इस संबंध में जानकारी कर रहे हैं। मामले की जांच की जाएगी।
सिददार्थ महाजन, जिला कलक्टर