
290 साल पहले बसा जयपुर आज परकोटे से निकलकर बाहर की तरफ फैल गया है। विकास का पहिया इतनी तेजी से घूम रहा है कि चारों दिशाओं में बसावट का दौर जारी है। सवाई जयसिंह ने जब जयपुर बसाया था तो शायद उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी कि उनका जयपुर विकास के सौपान इतनी तेजी से पार करेगा। इन सबके बीच यह भी किसी ने कल्पना नहीं की होगी कि जिन विरासत पर हम इतराते हैं, विकास के दौर में उन पर भी दाग लग जाएगा। शहर का नक्शा 290 साल में बिलकुल पलट गया है। जहां बेलगाडिय़ां चलती थीं, वहां आज लो फ्लोर बसें चल रही हैं। लोग चौपालों में बैठकर शहर की चर्चा करते थे, अब लोगों को इसकी फुर्सत ही नहीं है। बदलाव आया है, लेकिन संस्कृति खोती जा रही है।

1829 गलता गेट: पहले सिर्फ प्रवेश गेट ही दिखता था। लोग लंबा पैदल रास्ता तय कर तीर्थ के दर्शन करने आते थे।

गलता गेट... 2017: अब यहां क्रंकीट का जंगल है।

57 साल पहले का जौहरी बाजार: 1943 के बाद मिर्जा इस्माइल ने जौहरी बाजार में बरामदे बनवाए थे। बरामदे बनने के बाद लोगों को धूप-बारिश से राहत मिली। उस दौरान यहां किसी तरह का अतिक्रमण नहीं था। लोग सडक़ पर सुगमता से आते-जाते थे।

अब... बरामदों पर कब्जे और जाम के हालात

छोटी चौपड़: 147 साल पहले चौपड़ के चारों ओर दुकानें हुआ करती थी, जिन पर लोग रोजमर्रा का सामान खरीदते थे। चांदपोल से छोटी चौपड की ओर... पहले... उस समय नहीं थी वाहनों की रेलमपेल

छोटी चौपड़ अब... मेट्रो का चल रहा काम। वाहन की रेलमपेल। आज हजारों लोगों के रोजाना आवागमन की गवाह छोटी चौपड़ कितनी बदल गई है।

एमआई रोड: 1905 लोगों का आने-जाने का मुख्य साधन साइकिल हुआ करता था। इससे कभी जाम के हालात भी नहीं बने। उस समय भीड़-भाड़ नहीं थी। अब... एमआई रोड

40 लाख के करीब है शहर की जनसंख्या, 789.52 वर्ग किमी में है शहर का विस्तार, 76.44 प्रतिशत है शहर की साक्षरता