
'Open Prisons in India. A 'PAAR OVERVIEW'- कैदियों के प्रति मानवीय संवेदना पैदा करने का प्रयास
कैदियों के प्रति मानवीय संवेदना पैदा करने का प्रयास
'ओपन प्रिज़न्स इन इंडिया. ए पीएएआर ओवरव्यू ' में नजर आएगी मानवीय पक्ष
खुली जेलों पर बनी एनिमेटेड फिल्म
जयपुर, 26 जुलाई।हमारे समाज में कैदियों को अलग नजर से देखा जाता है। इस फिल्म के जरिए कैदियों को लोगों की नजरों में मानवीय बनाना और जेल की स्थितियों के बारे में जागरुकता पैदा करने के लिए प्रिजन एड एंड एक्शन रिसर्च 'पार' के जरिए प्रदेश की खुली जेलों पर अपनी तरह की अनूठी पहली एनिमेटेड फिल्म बनाई है।' ओपन प्रिज़न्स इन इंडिया. ए पीएएआर ओवरव्यू' शीर्षक वाली एनिमेटेड फिल्म में इस बात पर प्रकाश डालती है कि आदतन अपराधियों की तुलना में जेल भेजे गए अधिकांश अपराधी पहली बार के अपराधी होते हैं। उन्हें बंद जेल की सजा सुनाई जाती है जो कि भीड़भाड़ वाले होते हैं, जिसके परिणामस्वरूप वहां बुनियादी सुविधाओं में कमी होती है। बंद जेलों में कैदियों के लिए सुधार के अवसर बहुत कम या बिल्कुल ही नहीं होते हैं जबकि खुली जेल जेल पुनर्वास और सामाजिक पुनर्एकीकरण के लिए एक सेतु का काम करती है। फिल्म की अवधि लगभग 5 मिनट है। फिल्म का उद्देश्य खुली जेल प्रणाली को समर्थन देना है। फिल्म के एंजी और उपेश प्रधान ने डिजाइन किया है। सामाजिक मुद्दों पर अपने गीतों के लिए पहचाने जाने वाले संगीतकार सुस्मित बोस ने इसमें अपनी आवाज दी है। पार की संस्थापक स्मिता चक्रवर्ती ने कहा कि फिल्म बनाने में चार महीने लगे। जेल एक टैबू शब्द है। खुली जेल इंसानों को कैद करके रखने के खिलाफ हैं। गौरतलब है कि खुली जेलों पर चक्रवर्ती की सिफारिशों को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार और समर्थन किसा था और २०१७ में सभी राज्यों को उनकी सिफारिशों पर गौर करने और खुली जेल स्थापित करने का आदेश दिया था।
Published on:
26 Jul 2022 10:32 pm
बड़ी खबरें
View Allजयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
