उन्होंने कहा, '' पद्मावती फिल्म विवाद में सूचना प्रसारण मंत्रालय को संजय लीला भंसाली और करणी सेना से बात करनी चाहिए थी। फिर सेंसर बोर्ड के चैयरमेन से बात करते, बुलाकर बात करके फैसला हो सकता था। परंतु क्योंकि गुजरात के चुनाव चल रहे थे, जानबूझकर के इन्होंने इसको हवा दी और एक-एक करके बैन लगाए गए, एक साथ नहीं लगाए गए। कभी राजस्थान सरकार लगा रही है, कभी मध्यप्रदेश, कभी गुजरात। ये सब जानबूझकर आग लगाई गई। इसका परिणाम ये रहा कि सुप्रीम कोर्ट को पिक्चर में आना पड़ा।''