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पाकिस्तान से पुष्कर का है ये गहरा रिश्ता

भले ही कश्मीर मुद्दे (Kashmir issue) को लेकर पाकिस्तान (Pakistan) भारत से बेमतलब की जंग लड़ रहा है, लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू यह है कि भारत के अतीत के कई स्वर्णिम अध्याय पाकिस्तान में ही पलटे गए हैं। खासकर, राजस्थान में तीर्थराज कहे जाने वाले पुष्कर (Pushkar) के साथ पाकिस्तान का एक मजबूत और ऐतिहासिक रिश्ता है। यह रिश्ता दो पवित्र तीर्थों के कारण बना है, जो भगवान शिव से जुड़े हैं। इनमें पहला है, तीर्थराज पुष्कर और दूसरा है पाकिस्तान में स्थित कटासराज (katasraj) शिव मंदिर।
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जयपुर

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Chandra Shekhar Pareek

•

Updated: 8 Aug 2019, 9:00 PM IST

पाकिस्तान से पुष्कर का है ये गहरा रिश्ता

पाकिस्तान से पुष्कर का है ये गहरा रिश्ता

भले ही कश्मीर मुद्दे को लेकर पाकिस्तान भारत से बेमतलब की जंग लड़ रहा है, लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू यह है कि भारत के अतीत के कई स्वर्णिम अध्याय पाकिस्तान में ही पलटे गए हैं। खासकर, राजस्थान में तीर्थराज कहे जाने वाले पुष्कर के साथ पाकिस्तान का एक मजबूत और ऐतिहासिक रिश्ता है। यह रिश्ता दो पवित्र तीर्थों के कारण बना है, भगवान शिव से जुड़े हैं। इनमें पहला है, तीर्थराज पुष्कर और दूसरा है पाकिस्तान में स्थित कटासराज शिव मंदिर।

कटासराज का शिव मंदिर
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में जिला चकवाल शहर से करीब 30 किलोमीटर दूर दक्षिण में कोहिस्तान नमक पर्वत श्रृंखला में महाभारतकालीन कटासराज नाम का एक गांव है। इस मंदिर परिसर में राम, हनुमान और शिव मंदिर खासतौर से देखे जा सकते हैं। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार जब शिवजी की पत्नी सती का निधन हुआ तो वे इतना रोए कि उनके आंसू रुके ही नहीं और उन्हीं आंसुओं के कारण 2 तालाब बन गए। इनमें से एक राजस्थान में पुष्कर है और दूसरा यहां कटाशा में है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार शिव ने सती से शादी के बाद कई साल कटासराज में ही गुजारे थे। यह मंदिर करीब 900 साल पुराना है।

कहां है कटासराज
- भगवान शिव का यह मंदिर पाकिस्तान के चकवाल गांव से लगभग 40 किमी दूर एक पहाड़ी पर स्थित है।

खासियत
- मंदिर परिसर से लगा हुआ एक साफ पानी का एक कुंड भी है, जिसमें पानी का रंग दो तरह का है।
- कम गहराई वाले स्थान में पानी का रंग हरा तथा अधिक गहरे स्थान वाली जगह पर पानी का रंग नीला है।
- कुंड की विशेषता है कि यह कभी नहीं सूखता, इसके चलते श्रद्धालुओं का यहां तांता लगा रहता है।

पांडवों से संबंध
- मंदिर के बारे में यह भी कहा जाता है कि अज्ञातवास के दौरान पानी की खोज में पांडव इस जगह पहुंचे थे।
- यहीं पर यक्ष ने पांडवों से धर्म और जीवन से संबंधित सवाल पूछे थे, जिसका जवाब सिर्फ धर्मराज युधिष्ठिर ही दे पाए थे।
- पांडवों ने यहां छिपकर रहने के लिए 7 महल बनवाए थे। इसके बाद पांडवों ने यहां करीब 4 साल का वक्त गुजारा।

तीर्थराज पुष्कर
सृष्टि के रचियता ब्रह्मा की यज्ञस्थली और ऋषियों की तपस्यास्थली तीर्थगुरु पुष्कर नाग पहाड़ के बीच बसा हुआ है। यहाँ प्रति वर्ष विश्वविख्यात कार्तिक मेला लगता है। पुष्कर में अगस्तय, वामदेव, जमदाग्नि, भर्तृहरि इत्यादि ऋषियों के तपस्या स्थल के रूप में उनकी गुफाएँ आज भी नाग पहाड़ में हैं।

कहां पर है पुष्कर
सर्वधर्म समभाव की नगरी अजमेर से उत्तर-पश्चिम में करीब 11 किलोमीटर दूर नाग पहाड़ की तलहटी में बसा है।

खासियत
- तीर्थराज पुष्कर को सब तीर्थों का गुरु कहा जाता है। इसे धर्मशास्त्रों में पाँच तीर्थों में सर्वाधिक पवित्र माना गया है। पुष्कर, कुरुक्षेत्र, गया, हरिद्वार और प्रयाग को पंचतीर्थ कहा गया है।
- अर्द्ध चंद्राकार आकृति में बनी पवित्र एवं पौराणिक पुष्कर झील धार्मिक और आध्यात्मिक आकर्षण का केंद्र रही है।
- इस ब्रह्म सरोवर की उत्पत्ति के पीछे किंवदंती है कि ब्रह्माजी के हाथ से यहीं पर कमल पुष्प गिरने से जल प्रस्फुटित हुआ जिससे इस झील का उद्भव हुआ।

भगवान शिव से संबंध
- एक अन्य मान्यता यह भी है पत्नी सती के निधन से दुखी भगवान के दो आंसू गिरे, जिनसे 2 तालाब बन गए। इनमें से एक राजस्थान में पुष्कर है और दूसरा पाकिस्तान के कटासराज में है।
- यज्ञ में शामिल नहीं किए जाने से कुपित होकर ब्रह्मा की प्रथम पत्नी सावित्री ने केवल पुष्कर में ही ब्रह्माजी की पूजा किए जाने का श्राप दिया था।
- योगीराज श्रीकृष्ण ने पुष्कर में दीर्घकाल तक तपस्या की थी। सुभद्रा के अपहरण के बाद अर्जुन ने पुष्कर में विश्राम किया था। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने भी अपने पिता दशरथ का श्राद्ध पुष्कर में किया था।

गुलाब की खेती बेहद खास
पुष्कर में गुलाब की खेती भी विश्वप्रसिद्ध है। यहाँ का गुलाब तथा पुष्प से बनी गुलकंद, गुलाब जल इत्यादि का निर्यात किया जाता है। अजमेर में सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की पवित्र मजार पर चढ़ाने के लिए रोजाना कई क्विंटल गुलाब भेजा जाता है।

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