
राजस्थान की कला—संस्कति और विरासत का झरोखा है पैलेस ऑन व्हील्स
जयपुर. पर्यटन के क्षेत्र में विश्व मानचित्र पर अपना विशेष स्थान रखने वाली पैलेस ऑन व्हील्स रेलगाडी को देश की शान कहा जा सकता है। विश्व की प्रमुख लक्जरी रेलगाडियों में शुरू के पांच पायदान में अपना वजूद रखने वाली पैलेस ऑन व्हील्स राजस्थान की कला—संस्कति और विरासत को बखूबी दर्शाती है।
आठ दिन का राजसी सफर
पैलेस ऑन व्हील्स का अमूमन 8 दिन का सफर माना जाता है। जिसमें जयपुर ब्रज, गुजरात, हाडोती, दिल्ली सहित प्रमुख रूप से राजस्थान की भव्यता और संस्कति देखने को मिलती है। जैसलमेर का किला और रेतीले टीले तो मन मोह लेते है। पैलेस ऑन व्हील्स में हर तरह की सविधा उपलब्ध कराई गई है। यहां रहना किसी राजमहल में रहने का आनंद देता है। दसी व्यजंन के साथ—साथ पर्यटक अपनी पसंद का खाने का लुत्फ भी यहां उठाते हैं। इसमें एक बार में करीब 80 यात्री सफर कर सकते है।
मील का पत्थर हुई साबित
भारतीय रेलवे ने राजस्थान के पर्यटन व वैभव को विश्व के सामने लाने के लिए 1982 से पैलेस ऑन व्हील्स रेल की शुरूआत की थी। बाद में वर्ष 2009 में इसे न सिरे से तैयार कर िफर से चलाया गया। इसमें प्रमुख रूप से 14 सेलून है जो प्रदेश की अलग—अलग विरासत का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह रेलगाडी अब तक 50 हजार से अधिक पर्यटकों को सफर करा चुकी है। राजस्थान पर्यटन विकास निगम (आरटीडीसी) की ओर से संचालित पैलेस ऑन व्हील्स यात्रा की शुरुआत पांच सितम्बर से होने जा रही है। इसकी तैयारियां जोरों पर है। ट्रेन के इंटीरियर में बदलाव किया गया है। जिसके बाद इसका नया लुक देखने को मिलेगा।
30 यात्रियों के साथ पहला फेरा
नई दिल्ली से पहला फेरा 5 सितम्बर की सुबह शुरू होगा। पहले फेरे के लिए महज 30 यात्रियों ने ही बुकिंग कराई है।
ये है शाही ट्रेन का मार्ग
-दिल्ली, जयपुर, सवाई माधोपुर, चित्तौड़, उदयपुर, जैसलमेर, जोधपुर, भरतपुर, आगरा और फिर दिल्ली।
Published on:
27 Aug 2018 01:28 am
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