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13 दिन से 90 फीट नीचे कुंए में दबा है मजदूर, प्रशासन बोला अब तो मर गया होगा

कुंआ बना कब्र: पाली जिले की सुमेरपुर तहसील का मामला

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13 दिन से 90 फीट नीचे दबा है मजदूर, प्रशासन बोला अब तो मर गया होगा

13 दिन से 90 फीट नीचे दबा है मजदूर, प्रशासन बोला अब तो मर गया होगा

— परिवार का रो—रो बुरा हाल
— प्रशासन बोला, इतने दिन तक जिंदा थोड़े ही होगा

जंग जीतने से पहले ही हार मानना किसी कहते हैं इसी का उदाहरण देखने को मिल रहा है राजस्थान के पाली जिले में। पाली जिले की सुमेरपुर तहसील के कानपुरा गांव में पिछले 13 दिनों से एक मजदूर 90 फीट गहरे कुंए में दबा है। बाहर खड़े लोग और मजदूर के परिवार के सदस्य इस आस में हैं कि प्रशासन कुछ करेगा, मजदूर को जिंदा निकाल लेना, लेकिन अब प्रशासन ने खुद ही हाथ खड़े कर दिए हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वैसे तो मजदूर का शव कुंए से निकाला नहीं जा सका है, लेकिन हमारा मानना है कि इतने दिन से वो कुंए में दबा है तो अब तक उसकी मौत हो गई होगी। पाली पुलिस का कहना है कि इतने दिनों तक कुंए में मजदूर है अभी तक जिंदा थोड़े ही होगा, अब तक तो उसकी मौत हो गई होगी। स्थानीय लोगों के अनुसार कुंए की खुदाई का काम चल रहा था। 27 सितंबर की शाम करीब चार बजे कुंए का फर्मा टूट गया और मिट्टी ढह गई। जिससे मजदूर मुपाराम मीणा मिट्टी के नीचे दब गया। लोगों ने पुलिस को सूचना दी, लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी पुलिस इस मजदूर को कुंए से नहीं निकाल पाई। वहीं मजदूर की पत्नी और चार बच्चों का रो—रो कर बुरा हाल है। उन्हें एक ही उम्मीद है कि शायद उनके परिवार का मुखिया जिंदा हो और उसे बाहर निकाल लिया जाए।

परिवार के लिए रोटी कमाने गया था, लौटा ही नहीं

कुंए की खुदाई का काम सितंबर की शुरुआत में शुरू हुआ था। परिवार को पालने के लिए शिवगंज तहसील का जोगपुरा निवासी 45 वर्षीय मुपाराम मीणा मजदूरी करता था। लॉकडाउन के दौरान काम न मिला, फिर जब कुंए की खुदाई का काम मिला तो खुशी—खुशी वो करने लगा। लेकिन उसे क्या पता था कि यही काम उसकी जान पर भारी पड़ जाएगा। 27 सितंबर को एक अन्य मजदूर के साथ काम करने के दौरान कुंए की मिट्टी ढह गई और मुपाराम मलबे में दब गया। हालांकि दूसरे मजदूर ने जैसे—तैसे अपनी जान बचाई।

पांच दिन तक करते रहे इंतजार

मुपाराम के परिवार का कहना है कि घटना के बाद पांच दिन तक पूरा परिवार कुंए के पास ही बैठा रहा। उन्हें उम्मीद थी कि कोई चमत्कार होगा और मुपाराम वापस लौट आएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब प्रशासन ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं। परिजन अब प्रशासन से उनके शव को निकालने की गुहार कर रहे हैं, जिससे उनके अंतिम दर्शन कर अंतिम संस्कार किया जा सके।


इसलिए नहीं निकाल पा रहे

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि मुपाराम को निकालने के लिए कई प्रयास किए लेकिन कुंए की बनावट काफी संकरी है। कुंए में पानी की गहर पहले से ही दस फीट मिट्टी थी। फार्मा ढहने से करीब तीस फीट मिट्टी और कुंए में जा गिरी जिसमें मुपाराम फंसा है। अब संकरे कुंए से चालीस फीट मिट्टी निकालना ही चुनौती है। कुंए में न ही ज्यादा संसाधन जा सकते हैं, न ही मजदूर। इतना ही नहीं प्रशासन ने भीलवाड़ा से एक्सपर्ट भी बुलाया था, लेकिन कुंए में जाने के बाद उसे भी सांस लेने में तकलीफ होने लगी तो उसे वापस उपर बुला लिया गया। उधर, मुपाराम के परिजनों का कहना है कि इतने दिनों में प्रशासन ने कुंए से एक कंकर भी नहीं निकाला है। आरोप है कि मुपाराम को बचाने के पूरे प्रयास ही नहीं किए गए।