
Panchami Tithi
जयपुर. विक्रम संवत् 2077 में 25 जून का दिन बहुत अहम है. इस दिन सुबह 08 बजकर 48 मिनट तक आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है पर इसके उपरान्त पंचमी तिथि लग रही है. आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के साथ ही गुरुवार भी है. पंचमी तिथि और गुरुवार का यह संयोग सामान्य नहीं है. ज्योतिषिय और धार्मिक ग्रंथों में इसकी बहुत अहमियत बताई गई है. पंचमी तिथि के दिन भगवान शिव का पूजन करना बहुत शुभ होता है.
ज्योतिषिय और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार पंचमी तिथि में जन्म लेने वाले जातक को नाग देवता का पूजन जरूर करना चाहिए. ज्योतिषाचार्य पंडित दीपक दीक्षित बताते हैं कि इसका कारण यह है कि इस तिथि के देव नाग देवता को माना गया है. इसलिए ऐसे जातकों को नागों की पूजा करने के साथ ही नागों की रक्षा भी करना चाहिए. इन लोगों को किसी भी स्थिति में नाग को कभी भी मारना नहीं चाहिए, घर में नाग निकले तो उसे पकडकर जंगल में छोडना ही उतम रहता है.
कार्य पूर्ण करने वाली तिथि को पूर्णा तिथि कहा जाता है. खास बात यह है कि पंचमी तिथि भी पूर्णा तिथि की श्रेणी में मानी गई है. इसलिए इस तिथि के दिन शुरू किए गए पूर्ण होते हैं. पंचमी तिथि में सभी शुभ कार्यों को किया जा सकता है. हालांकि इस तिथि में सभी कार्य किए जा सकते हैं लेकिन एक काम की मनाही भी है. इस तिथि के दिन किसी को उधार देना उचित नहीं माना गया है.
तिथि और वार के संयोग का भी विधान है. ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र नागर बताते हैं कि पंचमी तिथि जब शनिवार के दिन होती है तो यह अशुभ योग होता है. इसे मृत्युदा योग कहा जाता है. जब पंचमी तिथि गुरुवार के दिन हो तो यह अति शुभ योग होता है. इसे सिद्धिदा योग कहा जाता है. नाम के अनुरूप सिद्धिदा योग में शुरू किए गए सभी कार्य सिद्ध होते है.
Published on:
25 Jun 2020 01:54 pm
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