
जयपुर। ईश्वर में अगर भरोसा है तो किस्मत में लिखा है वो पाओगे, लेकिन खुद पर अगर भरोसा है तो ईश्वर भी वह लिखेगा जो तुम चाहोगे। पैरा एथलीट और अर्जुन पुरस्कार विजेता दीपा मलिक की यह पंक्तियां वाकई में उनके जज्बे को बयां करती हैं। बाधाओं को पाटकर कैसे वो अपने मुकाम तक पहुंचीं, भले ही चंद शब्दों में उन्होंने अपने सेशन में इस बारे में बताया हो, लेकिन उनका साहस और सशक्तता उनकी आंखों में झलक रही थी।
सेशन के दौरान वह बताती हैं कि वर्ष 1999 में स्पाइनल ट्यूमर का सामना करना पड़ा, जिससे शरीर का निचला हिस्सा प्रभावित हुआ। व्हीलचेयर पर आना पड़ा, लेकिन इस व्हीलचेयर पर जीवन रुकने नहीं दिया। अंदर जिद थी कुछ पाने की तो खेल में अपने जीवन की राह खोज ली। मेरी बड़ी बेटी के भी इंजरी हुई और वह लकवाग्रस्त हो गई तो लोगों ने उसे भी ताने देना शुरू कर दिया। मुझे तब समझ आया कि मेरी मां क्यों रोती थी।
फोटोग्राफर विक्की रॉय ने देशभर में करीब 200 दिव्यांगजन की तस्वीरें खीचीं जिसमें से अधिकतर तस्वीरें इंडिया इंक्लूजन फाउंडेशन की वेबसाइट पर प्रकाशित हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि मेरी कोशिश यही रहती है कि मैं उनकी ऐसी तस्वीरें क्लिक न करूं जिससे कोई उन्हें दया की नजर से देखे।
बल्कि उनके अंदर के जज्बे, जीवन में कुछ करने की चाह और विपरीत परिस्थितियों में भी उनके साहस को दिखाने वाली तस्वीरें लेता हूं। भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति के फाउंडर डीआर मेहता ने कहा कि जयपुर फुट दिव्यांगजनों के लिए केवल कृत्रिम अंग नहीं है, बल्कि वह उनके अंदर आत्मविश्वास भरता है।
Published on:
01 Feb 2025 09:44 am

बड़ी खबरें
View Allजयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
