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जयपुर . स्कूलों में शिक्षा के नाम पर कारोबार ही नहीं हो रहा बल्कि बेधड़क लूट मची है। मनमानी फीस वसूलने के साथ किताबों, ड्रेस, स्टेशनरी के नाम पर भी अभिभावकों की जेब से पैसे ऐंठे जा रहे हैं। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीआरटी) की जो किताबें 25 से 200 रुपए में मिल रही हैं, निजी प्रकाशकों और स्कूलों की आपसी मिलीभगत से उनके 500 से 800 रुपए वसूले जा रहे हैं। कई किताबें ऐसी हैं, जिनकी वास्तविक कीमत 50 रुपए है लेकिन 500 रुपए तक वसूले जा रहे हैं। राजधानी सहित राज्यभर के ज्यादातर निजी स्कूल अभिभावकों को सूची थमाकर चिह्नित दुकान से ही किताबें, कॉपियां और स्टेशनरी लेने का दबाव बना रहे हैं।
कमीशन का खेल
जानकारों के अनुसार किताब-कॉपियों के जरिए लूट का खेल निजी प्रकाशक, वितरक व स्कूलों की मिलीभगत से चल रहा है। मोटे कमीशन और कमाई के फेर में पहले चहेता प्रकाशक चुना जाता है। फिर वितरक, स्कूलों का कमीशन जोड़कर किताब का अंकित मूल्य तय किया जाता है। जो किताब 500 रुपए में छात्र को बेची जा रही है, उसकी वास्तविक कीमत 100—150 रुपए के बीच है। मगर स्कूल अपने कमीशन के कारण खुद किताबें बेच रहे हैं या दुकानें तय कर अभिभावकों पर दबाव बना रहे हैं।
एनसीईआरटी की किताबें इतनी सस्ती
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीआरटी) की किताबें महज 25 रुपए से 200 रुपए में उपलब्ध हैं। आठवीं कक्षा तक·की किताबों की कीमत केवल 50 रुपए प्रति किताब है। ग्यारहवीं व बारहवीं कक्षा में किताबों की कीमत 100 से 200 रुपए तक ही है।
चौथी कक्षा की किताबें 5200 की, जबकि एनसीईआरटी की मिल रहीं रुपए 300 में। ए· अभिभावक ने राजस्थान पत्रिका को बताया कि उनकी बेटी प्रतापनगर स्थित एक स्कूल में चौथी कक्षा में पढ़ रही है। किताबों का सैट 5200 रुपए में दिया गया है। जबकि एनसीईआरटी में चौथी कक्षा की किताबें केवल 300 रुपए में मिल रही हैं।
भीलवाड़ा में अभिभावकों की अनोखी पहल
भीलवाड़ा में 15—20 अभिभावकों ने क्लब बनाया है, जो पिछले सत्र की किताबें लेता है। कोई भी अभिभावक बच्चे की पिछले सत्र की किताबें देकर अगली कक्षा की ले सकता है। क्लब एनसीईआरटी व राजस्थान बोर्ड , दोनों की किताबें अभिभावकों को उपलब्ध करा रहा है। इससे कई बच्चों कों किताबें नि:शुल्क मिल रही हैं।
यह है नियम
शिक्षा विभाग के अनुसार हर स्कूल को किताबों के लेखक और प्रकाशकों की सूची छात्रों को एक माह पहले बतानी होगी। वे किताबें कम से कम 3 दुकानों पर मिलनी चाहिए।
Published on:
28 Mar 2018 11:30 am
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