जयपुर। शहरवासियों को सहूलियत के लिए निगम ने पार्किंग तो बना दीं, लेकिन ये अवैध वसूली के अड्डे बनकर रह गए। राजस्व शाखा के अधिकारी नियम-शर्तें अपनों के हिसाब से तैयार करते हैं। यदि संवेदक से सेटिंग सही है तो तमाम रियायतें दे देते हैं और यदि पार्किंग का ठेका अनुरूप नहीं उठा तो शर्तें इतनी कठोर बना देते है कि ठेका निरस्त हो जाता है।
ऐसे समझें मिलीभगत
-ग्रेटर नगर निगम के नए कार्यादेश पर गौर करें तो बैंक गारंटी 10 दिन में जमा नहीं कराने पर ठेका निरस्त करने की बात लिखी है। जबकि नियमों में ठेका निरस्त करने का नहीं जुर्माने का प्रावधान है।
-पिछले वर्ष जारी हुए कार्यादेश में इस तरह की कोई शर्त ग्रेटर निगम की राजस्व शाखा की ओर से नहीं डालकर चहेते ठेकेदारों को फायदा पहुंचाया गया।
जौहरी बाजार: बोर्ड पर लिस्ट मिटाई
-जौहरी बाजार की पार्किंग में भी वाहन चालकों से शुल्क वसूली के नाम पर मनमानी की जा रही है। पत्रिका संवाददाता ने जब बाजार की पार्किंग में जाकर बाइक खड़ी तो उसने 10 रुपए मांगे। संवाददाता ने कहा कि ढाई-तीन घंटे लगेंगे तो ठेकेदार बोला: आकर पैसा देना। हर घंटे के 10 रुपए हैं।
-इतना ही नहीं, बाजार में जो पार्किंग शुल्क के बोर्ड लगे हैं, उन पर रेट लिस्ट ही गायब हो चुकी है। लेकिन, निगम के किसी भी कर्मचारी को यह नहीं दिख रहा है।