10 जुलाई 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

प्रतिभागियों ने स्क्रीनप्ले राइटिंग के बेसिक्स सीखे

तीन दिवसीय स्क्रीनप्ले राइटिंग कार्यशाला आरंभ
2 min read
Google source verification

जयपुर

image

Rakhi Hajela

Aug 06, 2021

प्रतिभागियों ने स्क्रीनप्ले राइटिंग के बेसिक्स सीखे

प्रतिभागियों ने स्क्रीनप्ले राइटिंग के बेसिक्स सीखे


जयपुर,6 अगस्त।
स्क्रीन राइटर और डायरेक्टर सौरभ रत्नू का कहना है कि पहले एक विचार का जन्म होता है, फिर लेखक उस विचार का निर्माण करता है जिससे कि वे बाद में इस आईडिया को स्क्रीन पर प्रस्तुत कर सकें। जवाहर कला केंद के कृष्णायन में शुरू हुई तीन दिवसीय स्क्रीनप्ले राइटिंग कार्यशाला में उनका कहना था कि स्क्रीनप्ले को इस तरह से लिखा जाना चाहिए कि इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे टेक्नीशियन्स को इसे समझने में आसानी हो। इसके बाद निर्माताओं के सामने कहानी को पिच किया जाता है और अभिनेताओं को अलग.अलग किरदार निभाने के लिए लाया जाता है। फिर शूटिंग शुरू होती है और कैमरा, साउंड और म्यूजिक जैसे विभिन्न एलिमेंट्स को शामिल किया जाता है। एक बार शूटिंग पूरी हो जाने के बाद फिल्म एडिटिंग के लिए जाती है जिसमें साउंड मिक्सिंग, कलर करेक्शन, विजुअल इफेक्ट्स आदि जैसी प्रक्रियाएं शामिल होती हैं। जब तक एडिटिंग पूरी नहीं होती,तब तक राइटर का काम खत्म नहीं होता।
उन्होंने कहा कि जब राइटर कहानी का पहला ड्राफ्ट लिखते हैं तो वे एक क्रिएटिव ब्लॉक में जा सकते हैं। उन्हें ऐसा लगने लगता है कि वे जो कहानी लिख रहे हैं वह पहले भी हो चुकी है। उन्होंने सलाह दी कि राइटर को बिना परवाह किए लिखते रहना चाहिए ताकि वह उस कहानी के करीब पहुंच सके जिसकी उसने कल्पना की थी। दूसरा ड्राफ्ट वह है जिसमें लेखन का बड़ा हिस्सा होता है। विभिन्न स्रोतों से प्रतिक्रिया के बाद राइटर अब खुले दिमाग से लिखना शुरू करता है और कहानी को फिर से लिखता है। ड्राफ्टिंग और री.ड्राफ्टिंग की प्रक्रिया से गुजरने के लिए राइटर को स्वयं को उचित समय देना चाहिए और काम को निष्पक्ष रूप से देखना चाहिए।
इससे पूर्व प्रतिभागियों ने जेकेके की महानिदेशक मुग्धा सिन्हा ने कहा कि महामारी के बाद से कौशल सीखने की आवश्यकता और भी बढ़ गई है। जेकेके की कार्यशालाओं का उद्देश्य लोगों को कला की विभिन्न शैलियों में कुशल बनाना है, जिससे कि वे स्वयं के लिए रोजगार उत्पन्न करने योग्य बन सकें। ये कार्यशालाएं लोगों पर केंद्रित हैं और उन्हें सीखने का उपयोगी अवसर प्रदान करेंगीं।