
पत्रिका अमृतं जलम्: गलताजी में स्वरूप खो चुकी प्राचीन बावड़ी को पुर्नजीवित करने के लिए शुरू हुआ श्रमदान
जयपुर. जल हमारे जीवन का सबसे बड़ा आधार है, क्योंकि जल नहीं तो कल नहीं। ऐसे में जल संरक्षण के लिए पत्रिका ने अमृतं जलम् अभियान के तहत प्राचीन जल स्त्रोतों को पुर्नजीवित करने का जो बीड़ा उठाया है। मैं उसकी प्रशंसा करता हूं। ये कहना है गलताजी तीर्थ के महंत स्वामी अवधेशाचार्य का, जो शनिवार को गलताजी स्थित प्राचीन हनुमानजी की बावड़ी में अभियान के तहत आयोजित श्रमदान कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान महंत ने कहा कि पत्रिका सामाजिक सरोकार के कार्यों में हमेशा आगे रहा है।
कार्यक्रम की शुरुआत महंत स्वामी अवधेशाचार्य के सानिनध्य में हुई। इस दौरान स्थानीय लोगों के अलावा मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश समेत देश के विभिन्न इलाकों से आए श्रद्धालुओं ने भी श्रमदान किया। मानव श्रंखला बनाकर मिट्टी को बाहर निकाला गया। युवाचार्य स्वामी राघवेंद्र ने बताया कि साल 2020 में अतिवृष्टि के कारण इस प्राचीन बावड़ी में पूरी तहर मिट्टी और मलवा भर चुका है। पत्रिका की अगुवाई में इस अभियान के तहत आज से श्रमदान शुरू हो गया है। उन्होंने कहा कि श्रमदान के बाद फिर से बावड़ी का वास्तविक स्वरूप लौट आएगा और उम्मीद है कि इस बार बरसात में ये बावड़ी फिर से जल से भर जाएगी।
श्रमदान के दौरान मैढ़ क्षत्रिय स्वर्णकार वेलफेयर सोसायटी के हेमंत सोनी व जिनेन्द्र सोनी, वर्गों सांस्कृतिक संस्था से सुनील जैन, पूर्व पार्षद विक्रम सिंह, मनीष सोनी समेत विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
भक्तों से अपील - 'श्रमदान करने आएं'
महंत स्वामी अवधेशाचार्य और युवाचार्य स्वामी राघवेंद्र ने गलताजी तीर्थ में आस्था रखने वाले सभी भक्तों से अपील है कि करीब 500 साल पुरानी इस बावड़ी को फिर से पुर्नजीवित करने में सहयोग दें और यहां आकर श्रमदान करें। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि आमजन पत्रिका के सरोकार के इस अभियान से स्वंय को जोड़े।
Published on:
28 May 2022 04:41 pm
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