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Video: ‘रेत के धोरो‘ में खिला ‘मोती‘ का फूल! इस शख्स ने मरूधरा में कर डाली मोती की खेती

गर्वा दक्षिण के राज्यों से सीपी मंगवाते हैं और अपने घर में सीमेंट के छोटे छोटे पोंड में सीप से मोती बनाने का काम करते हैं।

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जयपुर

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Punit Kumar

Nov 21, 2017

Pearl farming in Rajasthan

आशीष शर्मा/जयपुर। राजस्थान की मरूभूमि में भले ही पानी की किल्लत बनी रहती है लेकिन इसके बावजूद अब मरूधरा मोती उगलने लगी है। जयपुर जिले के किशनगढ़ रेनवाल में किसान नरेन्द्र गर्वा इन दिनों कल्चर मोती की फार्मिंग कर रहे हैं। अब उनकी मेहनत भी रंग लाने लगी है और अब मरूधरा में मोती की चमक बिखरने लगी है। कभी घर की छत पर किचन गार्डन बनाने का सपना देखने वाले गर्वा ने जब ठानी तो सोचा की कुछ अलग करके दिखाया जाए और फिर उन्होंने शुरू की मोती की खेती। आज उनके डिजायनर मोतियों की बाजार में खासा मांग बनी हुई है।

43 वर्षीय नरेन्द्र गर्वा बताते हैं कि उनके पास जमीन की कमी थी। ग्रेजुएट होने के बाद फोटोकॉपी का काम कर रहे थे। सपना था घर की छत पर सब्जियां उगाने का। इंटरनेट पर खोजबीन की तो मोती की फार्मिंग का पता चला। लेकिन सुना था कि मोती तो समुद्र में ही बनता है। फिर ओर पडताल की तो कल्चर मोती की फार्मिंग का पता चला। इसके बाद उन्होंने पहले भूवनेश्वर में ट्रेनिंग ली और फिर मोती की खेती शुरू की।

गर्वा दक्षिण के राज्यों से सीपी मंगवाते हैं और अपने घर में सीमेंट के छोटे छोटे पोंड में सीप से मोती बनाने का काम करते हैं। उनके इस काम में परिवार का पूरा सहयोग रहता है। गर्वा परिवार की मेहनत अब रंग लाने लगी है और मरूधरा पर मोती तैयार होने का सिलसिला शुरू हो गया है। गर्वा संभवतया राजस्थान में पहले व्यक्ति हैं जो कि मोती की खेती कर रहे हैं और उनकी इस पहल की सराहना कृषि मंत्री भी कर चुके हैं।

प्रशिक्षण भी दे रहे गर्वा

नरेन्द्र गर्वा बताते हैं कि कल्चर मोती की फार्मिंग में करीब दस महीने में डिजाइनर मोती तैयार हो जाता है जबकि गोल और हाफ राउंड मोती 16 से 18 महीने में तैयार हो जाता है। सीपी में विभिन्न डिजाइनों के बीज इम्प्लांट किए जाते हैं फिर सीपी से निकलने वाले तरल पदार्थ से धीरे धीरे ये इम्प्लांट किए गए बीज मोती बन जाते हैं। गिर्वा कहते हैं कि उनके द्वारा तैयार मोतियों, जर्मन सिल्वर के लॉकेट, अंगूठी, ब्रासलेट की बाजार में अच्छी खासी मांग हो रही है। खुद मोती की फार्मिंग करने के साथ ही गर्वा दूसरे लोगों को भी इसका प्रशिक्षण दे रहे हैं।

राशि रत्न के रूप में मांग अधिक

राशि के हिसाब से एस्ट्रोलॉजर मोती पहनने की सलाह देते हैं। ऐसा माना जाता है कि गुस्सा शांत रखने, पॉजिटिव एनर्जी के साथ ही बौद्धिक क्षमता में बढोतरी के लिए मोती धारण किया जाता है। रासायनिक रूप से मोती सूक्ष्म क्रिटलीय रूप में कैल्सियम कार्बोनेट होता है जो कि जीवों द्वारा कंसेंट्रिक लेयर्स में डिपॉजिट करके बनाया जाता है। रत्न और सौन्दर्य प्रसाधन के रूप में मोती का उपयोग प्राचीन काल से किया जा रहा है।