
पट्टों के लिए नहीं आ रहे लोग, सरकार ने फिर खोली रियायतों की पोटली
भवनेश गुप्ता
जयपुर। प्रशासन शहरों के संग अभियान में निर्धारित 10 लाख पट्टे बांटने के लक्ष्य को पाने के लिए सरकार लगातार रियायतें देती जा रही है। पुरानी आबादी व चारदीवारी क्षेत्र की सम्पत्तियों के मामले (धारा 69ए) में पट्टो के लिए जारी आदेश में फिर संशोधन किया है। इसके तहत पट्टे के लिए जरूरी मूल दस्तावेजों की कड़ी (चेन आॅफ डॉक्यूमेंट) में कोई दस्तावेज नहीं होने पर भी पट्टा दे देंगे। इसके लिए केवल शपथ पत्र लिया जाएगा। वहीं, 1 जनवरी 1992 से पूर्व के सम्पत्ति दस्तावेज, बेचाननामा, निर्माण स्वीकृति से जुड़ा दस्तावेज के राइडर को पूरी तरह हटाने की स्थिति साफ कर दी है। अब 31 दिसम्बर 2018 तक के दस्तावेज मान्य होंगे। नगरीय विकास, आवासन एवं स्वायत्त शासन विभाग ने शुक्रवार को संशोधित परिपत्र जारी कर दिया। 27 सितम्बर के परिपत्र कई बिन्दु भी जोड़े गए हैं।
संशोधन के साथ जोड़े नए बिन्दु
-सम्पति के मुख्य दस्तावेजों के अलावा वैकल्पिक दस्तावेज के आधार पर भी प्रूफ आॅफ राइट निर्धारित किया गया है। प्रूफ आॅफ राइट के तहत फ्री होल्ड पट्टा भी दिया जा सकेगा।
-यदि सम्पत्तिधारकों ने आपसी सहमति से उपविभाजन कर रखा है तो उसे मान्यता प्रदान करते हुए मौके की स्थिति के अनुसार पट्टा जारी किया जा सकेगा। ऐसे मामलों में उपविभान व पुनर्गठन शुल्क नहीं लगेगा।
-विकास प्राधिकरण, विकास न्यास के परिधि क्षेत्र में आने वाली पुरानी आबादी के जमीन पर सम्पति, जिसका स्वामित्व का दस्तावेज है तो उसे पट्टा दे सकेंगे।
-बेचाननामा, परिवारिक बंटवारानामा, वसीयत के आधार पर आवेदन को अधिकार प्राप्त है और वर्तमान में संबंधित सम्पत्ति पर कब्जा है तो पट्टा मिलेगा। इसमें 1 जनवरी 1992 से पूर्व के दस्तावेज का राइडर नहीं रहेगा।
-प्रूफ आॅफ राइट में नगरीय निकायों द्वारा 1 जनवरी 1992 से पूर्व जारी की गई निर्माण स्वीकृति को भी दस्तावेज माना गया। लेकिन इसमें भी इस तारीख का राइडर हटा दिया गया है।
- 1 जनवरी 1992 से 31 दिसम्बर 2018 तक निर्मित सम्पत्तियों के संबंध में स्वामित्व का मूल दस्तावेज होना आवश्यक होगा।
-रास्ते व सुविधा क्षेत्र पर किए गए अतिक्रमण का पट्टा नहीं दिया जाएगा। लेकिन स्वामित्व संबंधि कोई विवाद नहीं होने पर, सिटी सर्वे रिकॉर्ड से रिपोर्ट की आवश्यकता नहीं होगी।
-आवेदक के मूल दस्तावेजों में जो भूउपयोग दर्ज है, उसी के अनुरूप पट्टा जारी किया जाएगा। यदि आवेदक द्वारा भिन्न उपयोग का पट्टा चाहा गया है और मास्टर व जोनल प्लान के अनुरूप है, तो उससे भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क लेकर मापदण्ड अनुसार नया फ्री होल्ट पट्टा दिया जा सकेगा।
Published on:
12 Nov 2021 11:35 pm
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