
पल-पल टूटते हैं यातायात नियम मर्जी से चलते हैं लोग, जिम्मेदार बेफिक्र
जयपुर. गुर्जर की थड़ी से गोपालपुरा मोड़ टोंक रोड तक सड़क चौड़ी हुई तो लोगों को लगा, अब राहत मिलेगी। यातायात सुगम होगा, लोग नियम से चलेंगे और यातायात पुलिस अपनी व्यवस्थाओं को ठीक से संभालेगी लेकिन ऐसा हुआ नहीं। यातायात व्यवस्था सुधरने की बजाय इतनी बिगड़ गई कि एक नहीं बल्कि अनेक शोधार्थी इस सड़क की अराजकता के विभिन्न पहलुओं पर अलग-अलग शोध कर सकते हैं। राजधानी की सबसे चौड़ी सड़कों में शामिल इस रास्ते पर गाड़ी चलाना जान जोखिम में डालने से कम नहीं है। यहां प्राय: न तो यातायात पुलिस दिखती है, न ज्यादातर वाहन चालक नियमों का पालन करते हैं।
अव्यवस्था के कारण
- ट्रैफिक पुलिस की नियमित ड्यूटी नहीं। रिद्धि-सिद्धि तिराहा, त्रिवेणीनगर चौराहा और गुर्जर की थड़ी पर यदा-कदा, सिर्फ टोंक रोड पर नियमित।
- कई तिराहों-चौराहों पर जेब्रा क्रॉसिंग नहीं बनी।
- ट्रैफिक लेन के लिए वाइट लाइन नहीं है।
गुर्जर की थड़ी
यह चौराहा अंडरपास के ऊपर है लेकिन ४ नहीं बल्कि कई बार 5-6 तरफ से आवागमन होता दिखता है। सुल्ताननगर और न्यू आतिश मार्केट से वाहन गलत तरफ आते हैं। सुल्ताननगर वाली रोड पर स्टैंड के कारण राह और संकरी हो जाती है। पुलिस के नहीं रहने के कारण वाहन चालक मर्जी से चलते हैं। कई बार सिग्नल लाइट्स बंद रहने पर भी यातायात पुलिस नहीं दिखती।
रिद्धि-सिद्धि तिराहा
यहां पुलिसकर्मी रहते भी हैं तो किसी कोने में। मानसरोवर और गुर्जर की थड़ी की ओर से आने वाला ट्रैफिक निकलने के जुगाड़ में रहता है। कोने पर स्टॉपेज होने के कारण लोक परिवहन सेवा की गाडिय़ा रुकती हैं और जाम की स्थिति रहती है। रिद्धि-सिद्धि की तरफ सर्विस लेन पार्किंग की भेंट चढ़ चुकी है। इस रास्ते से लॉन्ग साइड वाहन खूब आते-जाते हैं।
चारों तरफ से ट्रैफिक का
लोड रहता है लेकिन उसे संभालने वाला कोई नहीं। मुख्य सड़क पर ट्रैफिक तो बेधड़क दौड़ता ही है, गलियों से ट्रैफिक मुख्य सड़क पर आता है, जिससे जाम की स्थिति रहती है।
डीसीपी ईस्ट ऑफिस
गोपालपुरा मोड, टोंक रोड ने कहा कि इस ट्रैफिक प्वाइंट पर भी पुलिस नजर नहीं आती। ऑफिस की तरफ से ट्रैफिक सड़क पर आता है तब यातायात बेतरतीब हो जाता है।
यहां चौड़ाई भले ही बढ़ गई लेकिन कोने पर बना स्टॉपेज समस्या बना हुआ है। टैम्पो, मिनी बस, लो-फ्लोर आदि एक के बाद एक रुकते हैं, जिससे अन्य वाहनों का गुजरना मुश्किल हो जाता है।
यह रहती है हालत
07 मुख्य ट्रैफिक प्वाइंट, पुलिस १ या २ पर दिखती है, वह भी कभी-कभी
3.6 कलोमीटर लम्बी सड़क, कदम-कदम पर टूटते हैं यातायात नियम
और कोई नियम हो तो वह भी टूट जाए
- रेड सिग्नल तो मजाक बन गया है, ज्यादातर सिग्नल पर वाहन चालक नहीं रुकते
- बिना हेलमेट दोपहिया चलाने वालों की संख्या भी कम नहीं
- सवारियां ओवरलोड भरकर वाहन बेधड़क दौड़ते हैं
- जेब्रा क्रॉसिंग का ध्यान ज्यादातर वाहन चालकों को नहीं रहता, गाड़ी उससे आगे खड़ी करते हैं
पुलिस का यह रवैया
- ट्रैफिक पुलिसकर्मी प्राय: नहीं दिखते
- मौजूद भी हों तो कोने में बैठकर चालान काटने में मशगूल रहते हैं, यातायात व्यवस्था संभालने में उनकी रुचि दिखाई नहीं देती

Published on:
30 May 2018 01:12 pm
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