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लोग भूले गेरू व खड़ी के माण्डने…रंगोली और स्टीकर की धूम

भागमभाग के चलते प्राचीन संस्कृति पर खतरा। गेरू और खड़ी के मांडने हुए बीते जमाने की बात।

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raktim tiwari

Nov 10, 2015

प्राचीन काल से चली आ रही घरों में माण्डने बनाने की परम्परा अब शहरी क्षेत्रों में धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही है। राजस्थानी संस्कृति में कला के प्रतीक माने जाने वाले माण्डनों का अब इतना प्रचलन नहीं है। लोगों के पास अब इतना समय भी नहीं है कि वह माण्डने बनाने में घंटों व्यतीत करें। कई घरों में माण्डनों का स्थान रेडिमेड पेपर रंगोली व पक्के रंगों से बनने वाली रंगोली ने ले लिया है।

परम्परागत माण्डने व रंगोली के लुप्त होने के कारण

1. समय का अभाव- महिलाओं व लोगों के पास अब इतना समय नहीं रह जाता है कि माण्डने या रंगोली के लिए समय निकालें।

2. महिलाएं नहीं जानती माण्डने बनाना- नई पीढ़ी की कई महिलाओं व युवतियों को माण्डने बनाना ही नहीं आता है। पहले बुजुर्ग महिलाएं इसे परिवार की अन्य महिलाओं को सिखाती थी।

3. पक्के घरों में नहीं बनते माण्डने- अब घरों में मार्बल व ग्रेनाइट के फर्श होते हैं। जहां माण्डने बनाना मुश्किल भरा काम है, क्योंकि माण्डने मिट्टी के कच्चे आंगन में अच्छे बनते हैं।

5. रेडिमेड रंगोली व स्टीकर- अब बाजारों में रेडिमेड स्टीकर का चलन बढ़ गया है। शहरों में लोग लोग त्योहार पर बाजार से सीधे रेडिमेड स्टीकर ही खरीद कर अपने आंगन में चिपका लेते हैं।

माण्डनों का महत्व
ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी शादी समारोह व अन्य त्योहारों पर माण्डने बनाए जाते हैं। इनका अपना ही अलग महत्व है। जिसमें महिलाएं गोबर व लाल मिट्टी से आंगन को लीप कर गेरू व खड़ी से अपने हाथों की उंगलियों से कलात्मक डिजाइन बनाती है जिसमें पारम्परिक राजस्थानी डिजाइन व अन्य कई तरह के कलात्मक डिजाइन बनाए जाते हैं। इनके जरिए यह माना जाता है कि यह माण्डने प्राचीन काल से चले आ रहे हैं। घर के परिण्डों व आंगन में जो माण्डने बनाए जाते थे, उनके लिए कहा जाता है कि यह माण्डने देवताओं के प्रिय होते हैं। आंगन में बनी यह सुन्दर कलाकृति बेहद लोकप्रिय समझी जाती है।

बदल रहा समय के साथ चलन
1.कच्चे आंगन का स्थान लिया पक्के आंगन ने- पहले जहां कच्चे घरों में गोबर व लाल मिट्टी से लीपे हुए आंगन होते थे, उनकी जगह अब पक्के मकान व मार्बल व ग्रेनाइट आंगन ने ले लिया है।

2. गेरू व खड़ी का स्थान लिया रंगों ने- गेरू व चूने के स्थान पर अब पक्के रंगों से माण्डने बनाए जाते हैं ताकि वे हमेशा के लिए बने रहें। इसके साथ ही सूखे रंगों से रंगोली का चलन भी देखा जा रहा है।
3. माण्डनों के स्थान पर स्टीकर- माण्डने व सूखे रंगों से बनने वाले माण्डनों की जगह अब स्टीकर पहली पसंद बन रहे हैं।

त्योहार के समय कई कार्य करने होते हैं। इस कारण इतना समय ही नहीं मिल पाता कि रंगोली या माण्डने बनाए। इसके लिए पेपर रंगोली व स्टीकर अच्छे रहते हैं।

मोनिका शर्मा

माण्डना बनाने के लिए दक्षता और समय की जरुरत है। यह सबके बस की बात नहीं है, इसलिए स्टीकर चिपकाना ही ठीक लगता है।

हेतल कंवर

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