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बीसलपुर बांध से चंबल में बह कर बर्बाद हो गया राजस्थान के जयपुर समेत तीन शहरों का आठ महीने से ज्यादा प्यास बुझाने का पानी

बांध से पानी बह कर हो रहा बर्बाद और जयपुर शहर में लोग बूंद-बूंद के लिए कर रहे हैं संघर्ष

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जयपुर.
बीसलपुर बांध लबालब भरने के बाद बीते 18 दिन में बांध से 8.5 टीएमसी पानी की निकासी हो चुकी है। यह पानी बनास नदी के जरिए चंबल में पहुंच कर बर्बाद हो रहा है। पानी की जितनी मात्रा बांध से निकासी हुई है उतने पानी से जयपुर,अजमेर और टोंक जिलों की लगभग 1 करोड़ की आबादी की आठ माह की पेयजल जरूरतें पूरी हो सकती थीं।
बीसलपुर बांध से बह कर चंबल में पहुंचे पानी को बर्बाद होने से बचाया जा सकता था। लेकिन इसके लिए जल संसाधन विभाग के इंजीनियरों ने कोई 15 वर्षों से नहीं किए। उधर अगर बांध से जयपुर शहर के लिए अतिरिक्त पानी का आरक्षण कर दिया जाता तो जलदाय विभाग आरक्षण पत्र के आधार पर जायका संस्था से 1100 करोड़ का लोन लेने की स्थिति में होता। इस राशि से बीसलपुर बांध से लेकर जयपुर तक 95 किलोमीटर लंबी लाइन बिछाने का रास्ता साफ हो जाता।
दोनों विभागों की रस्साकसी का नतीजा यह रहा कि बीसलपुर बांध से तीन जिलों के लिए आठ माह तक काम आने वाला पानी बर्बाद हो गय। जिसका न तो जल संसाधन विभाग को चिंता है और न ही जलदाय विभाग को।
उधर बीसलपुर बांध से पानी की इस तरह बर्बादी से जयपुर शहर के लोग दुखी हैं। उनका कहना है कि अगर जल संसाधन विभाग और जलदाय विभाग आपस में तालमेल से काम करते तो आज इतना पानी बांध से बर्बाद नहीं होता। प्रतिदिन बांध से लाखों लीटर पानी बह रहा है और जयपुर शहर में लोग पानी की बूंद बूंद के लिए संघर्ष कर रहे हैं।