
जयपुर.
राजस्थान में अब जल जीवन मिशन व अन्य पेयजल परियोजनाओं में लोहे की जगह प्लास्टिक के पाइप बिछेंगे। लोहे की जगह 100 से 200 एमएम के पीवीसीओ-ओ (प्लास्टिक) पाइप काम में लिए जाएंगे। इसके लिए सात वर्ष पहले बनी पाइप पॉलिसी-2015 में पीवीसीओ-ओ (प्लास्टिक) पाइप काम में लेने का प्रावधान जोड़ने की तैयारी की जा रही है। इंजीनियरों का कहना है कि ये पाइप पहाड़ी इलाकों की जगह सिर्फ मिट्टी वाले इलाकों की पेयजल परियोजनाओं में ही काम में लिए जाएंगे।
प्लास्टिक पाइप के उपयोग के लिए इंजीनियरों ने ये दिया तर्क
— लोहे के मुकाबले कीमत में 25 प्रतिशत तक सस्ता
— मजबूती भी लोहे के पाइप के बराबर ही
— एक जगह से दूसरी जगह तक लाने ले जाने में आसानी
लाइन की सुरक्षा को लेकर ये उठाए सवाल
— लाइन बिछाने से पहले जमीन का सर्वे कौन करेगा
— राइजिंग मैन में प्लास्टिक पाइप का उपयोग सुरक्षित नहीं
— लाइन की सुरक्षा किस तरह से सुनिश्चित होगी
— पंप चालू व बंद होने पर लगने वाले झटके से लाइन के क्षतिग्रस्त होने का खतरा
बैठक में हुई चर्चा,पॉलिसी में जोड़ा जाएगा प्रावधान
सूत्रों के अनुसार हाल में पीएचईडी के शीर्ष इंजीनियरों की बैठक में जल जीवन मिशन की पेयजल परियोजनाओं में प्लास्टिक के पाइप काम में लेने को लेकर चर्चा हुई। बैठक में इंजीनियरों ने यह तर्क भी दिया कि पहाड़ी इलाकों में प्लास्टिक पाइप का उपयोग नहीं किया जा सकता।
बढ़ते खर्च के कारण चरमरा रहा है जल जीवन मिशन
बड़ी पेयजल परियोजना के खर्च की बात करें तो जितना खर्च अन्य निर्माण सामग्री पर होता है उतना ही अकेले लोहे के पाइप की खरीद पर होता है। बीते दो वर्ष में देखें तो अन्य सामग्री के मुकाबले लोहे की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। ऐसे में खर्च के बोझ से जल जीवन मिशन की परियोजनाओं का ढांचा चरमराने लगा है और ठेकेदारों को भुगतान करने तक में इंजीनियरों को परेशानी आ रही है।
Published on:
31 Oct 2022 11:02 pm
