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फोन टैपिंग मामला: सीएम गहलोत के ओएसडी की याचिका पर आज सुनवाई

प्रदेश में फोन टैपिंग के मामले में सीएम अशोक गहलोत के ओएसडी लाेकेश शर्मा की याचिका पर आज दिल्ली हाईकाेर्ट में सुनवाई हाेगी।
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जयपुर

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Rahul Singh

Aug 06, 2021

jaipur

cm ashok gehlot

जयपुर। प्रदेश में फोन टैपिंग के मामले में सीएम अशोक गहलोत के ओएसडी लाेकेश शर्मा की याचिका पर आज दिल्ली हाईकाेर्ट में सुनवाई हाेगी। इस मामले में दिल्ली हाईकाेर्ट ने दिल्ली क्राइम ब्रांच और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत काे भी अपना जवाब पेश करने के लिए कहा था। सूत्रों के अनुसार आज इनका जवाब आ सकता है और इस पर बहस हाे सकती है।

शेखावत ने दर्ज कराई थी एफआईआर—
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने टैपिंग कांड में दिल्ली क्राइम ब्रांच में लाेकेश शर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। क्राइम ब्रांच ने लाेकेश काे पेश हाेने का नाेटिस दिया था। इस नाेटिस के खिलाफ लाेकेश शर्मा ने दिल्ली हाईकाेर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इसमें लोकेश शर्मा ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर निरस्त करने की मांग की थी। इस पर हाईकोर्ट ने छह अगस्त तक कोई भी कार्रवाई करने पर रोक लगा दी थी।

पिछले साल आया था सियासी भूचाल— राजस्थान की राजनीति में पिछले साल भूचाल आया था। उस वक्त तत्कालीन पीसीसी अध्यक्ष और डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने सीएम गहलोत के खिलाफ बगावत कर दी थी। पायलट अपने समर्थक विधायकों के साथ हरियाणा के मानेसर में चले गए थे और वहां कैंप कर लिया था। इस बीच एक आडियो टेप सामने आया था। इस आडियों टेप में दावा किया गया था कि इसमें गहलोत सरकार गिराने की साजिश को लेकर बातचीत चल रही है। इसमें विधायक भंवरलाल शर्मा, संजय जैन और शिकायतकर्ता के बीच की बातचीत का दावा किया गया था। शेखावत की ओर से ये भी कहा गया कि ये आडियों अवैध तरीके से रिकार्ड की गई और मुख्यमंत्री के ओएसडी लोकेश शर्मा ने इसे वायरल किया।

पायलट की चली गई कुर्सी— इस दौरान सचिन पायलट की कुर्सी चली गई और उन्हें उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष पद गंवाने पड़े। इस बगावत के बाद अगस्त 2020 के विधानसभा सत्र में भाजपा विधायक कालीचरण सराफ के सवाल का जवाब देते हुए सरकार ने फोन टैपिंग की बात स्वीकार की थी। इसको लेकर विपक्ष ने मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग की थी। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने राज्य सरकार, सीएम के ओएसडी और पुलिस अफसरों के खिलाफ दिल्ली में एफआईआर दर्ज करवाई थी। इस एफआईआर में उन्होंने विधानसभा में मंत्री शांति धारीवाल के जवाब को आधार बनाया था। धारीवाल ने विधानसभा में स्वीकार किया था कि आडियो मुख्यमंत्री के ओएसडी ने वायरल किए थे।