
जयपुर. प्रदेश के 508 पूर्व विधायकों को हर महीने हजारों रुपए पेंशन देने के खिलाफ राजस्थान हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर हुई। याचिका पर आने वाले सप्ताह में सुनवाई की संभावना है। वरिष्ठ पत्रकार मिलापचंद डांडिया की ओर से दायर जनहित याचिका में मुख्य सचिव, विधानसभा अध्यक्ष और महाधिवक्ता को पक्षकार बनाया है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विमल चौधरी ने बताया कि सूचना के अधिकार कानून से मिली जानकारी के अनुसार प्रदेश में 508 पूर्व विधायकों को करीब 26 करोड रुपए सालाना पेंशन के तौर पर दिए जा रहे हैं। इनमें से कई विधायक वर्तमान में भी एमएलए हैं। आधा दर्जन से अधिक पूर्व विधायकों को एक लाख रुपए से ज्यादा मासिक पेंशन राशि दी जा रही है। वहीं सौ से अधिक पूर्व विधायकों को मासिक पचास हजार रुपए से अधिक की पेंशन दी जाती है। राज्य सरकार राजस्थान विधानसभा (अधिकारियों और सदस्यों की परिलब्धियां एवं पेंशन) अधिनियम, 1956 व राजस्थान विधानसभा सदस्य पेंशन नियम, 1977 बनाकर पूर्व विधायकों को पेंशन का लाभ दे रही है। जबकि संविधान के अनुच्छेद 195 और राज्य सूची की 38वीं एन्ट्री में पूर्व विधायकों को पेंशन देने का प्रावधान नहीं है। पेंशन एक तय आयु के बाद सेवानिवृत्त होने वाले व्यक्ति को दी जा सकती है जबकि विधायक सेवानिवृत्त नहीं होते हैं, बल्कि ये जनप्रतिनिधि अधिनियम के तहत चुने जाते हैं और उनका तय पांच साल का कार्यकाल होता है। जनप्रतिनिधि को राज्य का सेवक भी नहीं माना जा सकता। यदि विधायक राज्य सेवक है तो पंचायत समिति और निगम के जनप्रतिनिधियों को इस श्रेणी में क्यों नहीं माना जाता। याचिका में वर्ष 1956 के अधिनियम और वर्ष 1977 के नियम को अवैध घोषित कर रद्द करते हुए दी गई राशि की रिकवरी करने की गुहार की है।
Published on:
14 Dec 2022, 11:14 PM IST
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