जयपुर। जेेकेके की पाक्षिक नाट्य योजना के तहत मंगलवार को नाटक ‘राम की शक्तिपूजा’ का मंचन हुआ। जयपुर में पहली बार हुए इस नाटक ने दर्शकों के दिलों पर छाप छोड़ दी। छऊ, कथक और भरतनाट्यम के सुंदर संयोजन के साथ महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के काव्य के भावों को दर्शकों तक पहुंचाया गया। निराला के काव्य से डॉ. शकुन्तला शुक्ल ने नाट्यालेख बुना जबकि व्योमेश शुक्ल ने नाटक का निर्देशन किया।
अंधेरे से अटे कृष्णायन सभागार में केवल जलती मशाल पंक्ति पर नृत्य के साथ नाटक की शुरुआत होती है। राम.रावण युद्ध चल रहा है। रावण के साथ शक्ति को लड़ता देख राम हताश हैं। सभी योद्धा उनके समीप बैठे हैं। जामवंत उन्हें आराधना का उत्तर आराधना से देने की युक्ति सुझाते हैं। शक्ति की करो मौलिक कल्पना, करो पूजन, छोड़ दो समर जब तक न सिद्ध हो रघुनन्दन जामवंत के इन शब्दों को सुनकर राम दुर्गा की पूजा शुरू करते हैं। वे नौ दिन की पूजा में 108 नीलकमल चढ़ाने का संकल्प लेते हैं। उनकी परीक्षा लेने को देवी एक कमल छिपा देती हैं।
होगी जय, होगी जय, हे पुरुषोत्तम नवीनश्..
साधना में लीन राम को स्मरण होता है कि उनकी मां उन्हें राजीव नयन कहती थी। कहती थी मां मुझको सदा राजीव नयन, दो नील कमल है शेष अभी,यह पुरश्चरण पूरा करता हूँ देकर मात: एक नयन। यह कहते हुए राम अपनी आंख भेंट करने को तीर उठाते हैं तभी शक्ति उनके सामने प्रकट होती हैं। होगी जय, होगी जय, हे पुरुषोत्तम नवीन! कह महाशक्ति राम के वदन में हुईं लीन,राम की प्रतिबद्धता व विनय को देख शक्ति उन्हें विजय का वरदान देती हैं। नृत्य और आंगिक अभिनय प्रधान इस नाटक में कलाकारों की वेशभूषा ने भी दर्शकों का ध्यान खींचा।
इन्होंने अदा किए किरदार
तापस शुक्ल ने हनुमान, विभिषण और जामवंत के किरदार अदा किए। स्वाति विश्वकर्मा राम बनीं जबकि नंदिनी विश्वकर्मा ने सीता, अंजना व देवी की भूमिका निभाई। साश्वी लक्ष्मण और शाश्वत अंगद बने।