
pneumonia became a threat to the children of one to five years
समय पर सही इलाज नहीं करवाने और बीमारी के लक्षणों को नहीं पहचाना जाए तो यह मौत कारण बन जाती है। इनमें से निमोनिया भी एक ऐसी ही बीमारी है, जो एक से पांच साल तक के बच्चों को लिए खतरा बना हुआ हैं।
आज विश्व निमोनिया दिवस है। हर साल यह 12 नवंबर को मनाया जाता है। इस गंभीर बीमारी के प्रति जागरुकता और इसकी गंभीरता बताने को लेकर इस दिन को मनाने की शुरुआत की गई थी।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों की माने तो विश्व में हर 43 सेकेंड में निमोनिया से एक बच्चे की मौत है। यह आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं। क्योकि निमोनिया से मरने वालों में अधिकत्तर बच्चों की उम्र एक से पांच साल तक की हैं। ऐसा नहीं है कि निमोनिया से बचाव संभव नहीं हैं।
अगर समय बच्चों के टीके लगवाए जाए और सामान्य सर्दी,फीवर,खांसी,कफ की शिकायत होने पर बच्चों को डॉक्टर के पास या नजदीकी अस्पताल में ले जाकर समय पर इलाज करवाया जाए तो बच्चों को मौत के मुंह में जाने से बचाया जा सकता हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के रेकॉर्ड के अनुसार विश्व में 2019 में निमोनिया से 25 लाख लोगों की मृत्यु हुई। सभी पीड़ितों में से लगभग एक तिहाई पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चे थे।
प्रतिवर्ष निमोनिया से लगभग 45 करोड़ लोग प्रभावित होते हैं, जो कि विश्व की जनसंख्या का सात प्रतिशत है। विकासशील देशों में बुजुर्गों, बच्चों और रोगियों में निमोनिया अभी भी मृत्यु का एक प्रमुख कारण बना हुआ है।
वर्ष 2014 में देश में 7,12,028 निमोनिया केस मिले थे। इनमें से 2599 ने दम तोड़ दिया था। वहीं वर्ष 2015 में 6,42,152 केस निमोनिया के मिले थे। जिनमें से 2410 ने दम तोड़ दिया था। राजस्थान में यह आंकड़ा 1,08,427 था। जिसमें से 128 की मौत हुई थी।
भारत के अलग अलग राज्यों की बात की जाए तो निमोनिया के केस सबसे ज्यादा अकेले राजस्थान में मिलते हैं। राजस्थान में सबसे ज्यादा 1,08,427 केस मिले है।
उत्तरप्रदेश में 84,428,मध्यप्रदेश में 70 हजार 28 केस मिले है। जो भारत में किसी भी राज्यों में मिलने वाले केसों में सबसे ज्यादा हैं।
जयपुर JK loan अस्पताल के चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. वीके गर्ग -ने बताया कि बच्चों में इम्यूनिटी कम होती है इसलिए उन्हें खतरनाक निमोनिया होता है। इम्नयूनिटी कम होने के कारण वह निमोनिया के बैक्टीरिया को झेल नहीं पाते है। फेफड़ों में सूजन या पानी भर जाने की स्थिति को निमोनिया कहते हैं।
यह एक आम बीमारी है जिसका बचाव एवं इलाज संभव पूरी तरह है लेकिन समय पर सही इलाज न कराने पर यह गंभीर रूप भी ले सकती है। हालांकि टीकाकरण से इसका बचाव संभव है।
सरकार बच्चों को मुफ्त में इस बीमारी के बचाव का टीका लगवा रही है। समय पर टीकाकरण और खांसी, जुखाम, वायरल इनफेक्शन का सही समय पर इलाज बच्चों को निमोनिया से बचा सकता हैं।
Published on:
12 Nov 2022 10:43 am
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