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राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल की कारगुजारी,सिर पर आया खतरा तो राजवायु एप से हटा दिया जयपुर का प्रदूषण

जयपुर में प्रदूषण का स्तर छिपाने के लिए पॉल्यूशन का आॅनलाइन डेटा उपलब्ध करवाने वाले राजवायु एप में से 2.5 एमएम पार्टिकल्स वाले मीटर को ही बंद कर दिया।

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जयपुर

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Rajesh

Nov 14, 2017

 Rajasthan State Pollution Control Board dropped Jaipur's Pollution  from RajVayu App

राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने जयपुर में प्रदूषण का स्तर छिपाने के लिए पॉल्यूशन का आॅनलाइन डेटा उपलब्ध करवाने वाले राजवायु एप में से 2.5 एमएम पार्टिकल्स वाले मीटर को ही बंद कर दिया। आज राजवायु एप शास्त्री नगर इलाके में सिर्फ 10 एमएम पार्टिकल्स का स्तर ही दिखा रहा है। जबकि सी—स्कीम में 2.5 एमएम और 10 एमएम पार्टिकल्स दोनों का ही लेवल दर्शाने वाले मीटर बंद कर दिए। प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने सिर्फ जयपुर शहर में ३ जगहों पर पॉल्यूशन मीटर की आॅनलाइन डेटा सर्विस बंद कर दी। जबकि राज्य के जोधपुर , पाली, उदयपुर , कोटा , अजमेर , अलवर और भिवाड़ी में प्रदूषण के स्तर का डेटा एप पर लगातार अपडेट हो रहा है।

दिल्ली एनसीआर से सटे भिवाड़ी में आज भी प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर पर बना हुआ है। जयपुर में धुंध का असर नहीं होने के कारण दिल्ली से आए प्रदूषण के स्तर में आज कमी नजर आ रही है। हवा चलने के कारण प्रदूषण के स्तर में कमी आई है।

राजवायु एप पर फिलहाल जयपुर के पॉल्यूशन मीटर को बंद किया है। कल से इसकी मेंटिनेंस शुरू की गई है। जबकि बाकी के ७ शहरों का पॉल्यूशन डेटा लगातार अपडेट हो रहा है। एक—दो दिन में जयपुर के पॉल्यूशन लेवल का अपडेट मिलना शुरू हो जाएगा। रामप्रकाश वर्मा, एसएसओ(लैबोरेट्री), राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल

आपको बता दें कि राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल के हवा में प्रदूषण का स्तर मापने वाले राजवायु एप पर एक्यूआई कल 500 के पार हो गया था, जिसे खतरनाक स्तर माना जाता है। जयपुर में 2.5 एमएम वाले पार्टिकल्स का लेवल 500 के पार हुआ है। इसका मतलब ये है कि बारीक धुएं के कण जयपुर की हवा में ज्यादा है। जबकि 10 एमएम वाले पार्टिकल्स का स्तर 189 ही है। कल 10 एमएम पार्टिकल्स का स्तर 329 तक पहुंच गया था। आमतौर पर जयपुर में 10 एमएम वाले पार्टिकल्स का प्रदूषण ही 400 के पास पहुंचता रहा है। लेकिन ऐसा संभवत: पहली बार हुआ है जब 2.5 एमएम पार्टिकल्स का स्तर 500 के पार हुआ है। प्रदूषण नियंत्रण मंडल से मिली जानकारी के अनुसार 2.5 एमएम पार्टिकल्स की हवा में मौजूदगी इस बात का स्पष्ट संकेत हैं पंजाब—हरियाणा में धान की फसल जलाने से उत्पन्न धुंआ जयपुर की हवा में घुल गया है।