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(पेज 2 एंकर) अनार की खेती से किसान ने रचा सफलता का नया अध्याय, नागरासकोप्प के कुबेरप्प बने प्रेरणा स्रोत

जयपुर

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Newsdesk

Aug 19, 2026

Rajasthan

गदग. पारंपरिक खेती से हटकर आधुनिक और लाभकारी कृषि की ओर बढ़ते किसानों के बीच गदग जिले के गजेंद्रगढ़ के निकट नागरासकोप्प गांव के प्रगतिशील किसान कुबेरप्पा मलियप्पा बडिगेर ने अनार की खेती से उल्लेखनीय सफलता हासिल कर क्षेत्र में नई मिसाल कायम की है। उनके 13 एकड़ मसीरी भूमि में महाराष्ट्र की जैन कंपनी की ‘केसर’ किस्म के अनार के बागान में इस समय भरपूर फलन दिखाई दे रहा है। सहफसली खेती से शुरू हुआ सफर कुबेरप्पा ने वर्ष 2016 में सहफसली खेती के रूप में नुगे के साथ लगभग दो हजार अनार के पौधे लगाए थे। प्रारंभिक वर्ष में उन्हें लगभग 3 लाख रुपए की आय हुई, जो दूसरे वर्ष बढक़र 22 लाख रुपए तक पहुंच गई। इसके बाद लगातार उत्पादन और बाजार मांग बढऩे से वार्षिक आय 50 लाख से 70 लाख रुपए के बीच पहुंच गई। बढ़ते लाभ को देखते हुए उन्होंने धीरे-धीरे अनार की खेती का क्षेत्र भी विस्तार किया। 111 प्रति किलो की दर से सीधी खरीद वर्तमान में चेन्नई और बेंगलूरु के व्यापारी उनके बाग से सीधे 111 प्रति किलो की दर से अनार खरीद रहे हैं और खेत से ही माल का उठाव कर रहे हैं। यदि यही बाजार दर बनी रहती है तो इस वर्ष खर्च घटाने के बाद लगभग 1 करोड़ रुपए तक का शुद्ध लाभ मिलने की उम्मीद है। श्रमिकों को मिला नियमित रोजगार आठ एकड़ क्षेत्र में अनार की खेती पर 35 से 40 लाख रुपए का निवेश किया गया है, जबकि उत्पादन 100 क्विंटल से अधिक पहुंच चुका है। बागान में 20 से अधिक स्थानीय श्रमिकों को नियमित रोजगार मिला है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है। परिवार का साथ, किसानों के लिए प्रेरणा कुबेरप्पा के साथ उनके भाई और परिवार के सदस्य भी खेती कार्य में सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। उनकी सफलता आधुनिक तकनीक, मेहनत और वैज्ञानिक कृषि के समन्वय की प्रेरक मिसाल बन गई है। आसपास के किसान उनके बागान में पहुंचकर अनार उत्पादन की तकनीक और प्रबंधन की जानकारी भी ले रहे हैं।