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निकाय चुनाव में पहली बार एआई की एंट्री, ले रहे जीत की सलाह

जयपुर

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Newsdesk

Aug 28, 2026

Rajasthan

बनवा रहे पोस्टर, हर तीन दिन में बदल रहे डिजाइन


कार्टन भी लगाएं

दौसा. निकाय चुनाव में अब तक पोस्टर, बैनर, जनसंपर्क और सभाओं के जरिए मतदाताओं तक पहुंच बनाने की होड़ रहती थी, लेकिन इस बार नगर निकाय चुनावों में तकनीक का नया रंग भी देखने को मिल रहा है। दौसा में नगर परिषद और नगर पालिकाओं के चुनाव को लेकर कई संभावित प्रत्याशी और उनके समर्थक अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का सहारा ले रहे हैं। कोई एआई से चुनावी रणनीति पूछ रहा है तो कोई पोस्टर और प्रचार सामग्री तैयार करवा रहा है।

उम्मीदवार एआई से यह भी पूछ रहे हैं कि उनके क्षेत्र में मतदाताओं तक बेहतर तरीके से कैसे पहुंच बनाई जाए, प्रचार की शुरुआत किस तरह की जाए और किन मुद्दों को प्राथमिकता दी जाए। हालांकि एआई किसी उम्मीदवार की जीत की गारंटी नहीं दे सकता, लेकिन उपलब्ध जानकारी के आधार पर रणनीति के विकल्प सुझाने में मददगार हो सकता है।


अलग से सौंपी जिम्मेदारी


चुनाव प्रचार में सबसे ज्यादा प्रयोग एआई से तैयार होने वाले पोस्टर और क्रिएटिव में देखने को मिल रहा है। प्रत्याशी अपनी फोटो, नाम और चुनावी संदेश के साथ अलग-अलग डिजाइन तैयार करवा रहे हैं। कुछ प्रचार टीमों में हर तीन दिन में पोस्टर का डिजाइन बदलने की तैयारी है, ताकि सोशल मीडिया पर प्रचार सामग्री एक जैसी न लगे और लोगों का ध्यान बना रहे। एआई की मदद से कुछ ही समय में अलग-अलग रंग, फॉन्ट, बैकग्राउंड और संदेश के साथ कई विकल्प तैयार किए जा सकते हैं।



फायदा : कम समय में ज्यादा विकल्प



पोस्टर बनाने वाले दौसा के युवा आशीष व अनिल ने बताया कि एआई का सबसे बड़ा फायदा समय और लागत की बचत माना जा रहा है। पहले पोस्टर का डिजाइन तैयार कराने में काफी समय लगता था, जबकि एआई से कुछ मिनटों में कई डिजाइन विकल्प सामने आ जाते हैं। प्रचार सामग्री में बदलाव करना भी आसान है। भाषण, सोशल मीडिया पोस्ट, नारे और क्षेत्रवार मुद्दों की सूची तैयार करने में भी एआई मदद कर सकता है।



नुकसान : गलत जानकारी का खतरा



इसके साथ जोखिम भी हैं। एआई से मिली जानकारी हमेशा सही हो, यह जरूरी नहीं है। स्थानीय मतदाताओं की वास्तविक सोच, व्यक्तिगत रिश्ते और जमीनी समीकरण को एआई पूरी तरह नहीं समझ सकता। गलत या भ्रामक जानकारी के आधार पर बनाई गई रणनीति नुकसान पहुंचा सकती है। इसी तरह एआई से तैयार तस्वीर या सामग्री में तथ्यात्मक गलती होने पर प्रत्याशी की छवि प्रभावित हो सकती है।



जमीन पर जनसंपर्क ही सबसे अहम



वहीं राजनीति से जुड़े मुकेश मीणा व सतीश गुर्जर ने बताया चुनावी प्रचार में एआई एक नया उपकरण जरूर बन रहा है, लेकिन अंतिम फैसला मतदाताओं का ही होगा। प्रत्याशियों के लिए एआई रणनीति बनाने और प्रचार सामग्री तैयार करने में मददगार हो सकता है, मगर वार्ड के लोगों से सीधा संवाद, स्थानीय समस्याओं की समझ और लगातार जनसंपर्क की भूमिका अभी भी महत्वपूर्ण रहेगी।