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राजस्थान में बिछने लगी छात्रसंघ चुनावों की चौसर, ऐसा बन रहा है माहौल

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जयपुर

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Nidhi Mishra

Aug 23, 2018

preparations of student union election 2018 in Rajasthan

preparations of student union election 2018 in Rajasthan

अलवर। अलवर में छात्रसंघ चुनावों का बन रहा माहौल प्रत्याशी टिकट के लिए कर रहे नारेबाजी चुनाव प्रचार जारों पर अलवर जिले के सरकारी कॉलेजों में अन्य जिलों के साथ ही 31 अगस्त को चुनाव होंगे। अलवर में चुनाव नजदीक आते ही चुनाव प्रचार तेज हो गया है। शहर के राजर्षि महाविद्यालय में सबसे ज्यादा चुनावी माहौल दिख रहा है। प्रत्याशी विद्यार्थी संगठनों से टिकट की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही कॉलेजों में विद्यार्थियों की भीड़ जुटना शुरु हो गई है। महाविद्यालयों में आज मतदाता सूची भी चस्पा की जाएगी। हालांकि प्रत्याशियों का पता नामांकन के बाद ही लग पाएगा, लेकिन ज्यादातर प्रत्याशियों ने प्रचार कर चुनाव में उतरने के संकेत दे दिए हैं।


वहीं नागौर जिले के जायल के राजकीय महाविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव अधिघोषणा जारी कर दी गई है। साथ ही आज से ही आचार संहिता लागू हो गई है। इसके साथ ही मतदाता सूची का प्रकाशन कर दिया गया है। महाविद्यालय में कुल 472 विद्यार्थी मतदान करेंगें, जिसमें 284 छात्र व 188 छात्राएं हैं। चुनाव के लिए डॉ सुनीता बेनीवाल को मुख्य निर्वाचन अधिकारी नियुक्त किया गया है। 25 अगस्त को चारों पदों के लिए नामांकन दाखिल किए जाएंगे। 31 अगस्त को सुबह 8 से 1 बजे तक मतदान होगा।

परिचय पत्र के साथ ही कर पाएंगे मतदान
मतदान में वही विद्यार्थी भाग ले सकेंगे, जिनके पास महाविद्यालय का परिचय पत्र होगा। परिचय पत्र जारी करने की अंतिम तिथि 30 अगस्त है।

सक्रिय हुए छात्र संगठन
छात्र संघ चुनावों को लेकर एबीवीपी, एनएसयूआई सहित निर्दलीय प्रत्याशियों के समर्थन में चौसर बिछनी शुरू हो चुकी है। बैठकों के दौर के साथ ही डोर टू डोर जनसम्पर्क कर मतदाताओं को रिझाने का प्रयास किया जा रहा है।

इन मुद्दों पर लड़ेंगे चुनाव
राजकीय महाविद्यालय को चार वर्ष बाद भी अजमेर विश्वविद्यालय से सम्बद्धता नहीं मिलने, प्राचार्य सहित अधिकांश व्याख्याताओं के रिक्त पद, साइंस लैब, एनसीसी की मांग प्रमुख चुनावी मुद्दे हैं। कला संकाय के स्वीकृत 7 में से 5 व साइंस संकाय के स्वीकृत 5 में से 4 व्याख्याताओं के रिक्त पद के चलते छात्रों की पढ़ाई चौपट हो चुकी है। सरकार ने गत सत्र से भले ही साइंस संकाय की स्वीकृति प्रदान कर दी, लेकिन ना ही साइंस लैब बनी और ना ही साइंस के व्याख्याता लगे। मजबूरन अधिकांश छात्र फेल होकर कॉलेज छोड़ चुके हैं।