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कॉलोनियाें के नियमन में सहकारी समितियों को ‘बेअसर’ करने की तैयारी

नियमन प्रक्रिया में गृह निर्माण सहकारी समितियों के दस्तावेज की बजाए अन्य विकल्प तलाशे जा रहे

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कॉलोनियाें के नियमन में सहकारी समितियों को 'बेअसर' करने की तैयारी

कॉलोनियाें के नियमन में सहकारी समितियों को 'बेअसर' करने की तैयारी


जयपुर। राज्य सरकार ने प्रशासन शहरों के संग अभियान में कॉलोनियाें के नियमन में सहकारी समितियों को "बेअसर" करने की तैयारी कर ली है। इसके लिए निमयन प्रक्रिया में गृह निर्माण सहकारी समितियों के दस्तावेजों के साथ-साथ अन्य विकल्प भी तलाशे जा रहे हैं। यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ने पट्टा लेने वाले भूखंडाधारियों को सहकारी समितियों की मनमानी से बचाने के लिए संबंधित अफसरों की कोर टीम के साथ मैराथन चर्चा भी कर चुके हैं। इसके तहत 5 विकल्प तलाशे गए हैं, जिन्हें नियमन के लिए बतौर दस्तावेज स्वीकृत किया जा सकता है। इससे सहकारी समितियों से दस्तावेज लाने की बंदिश से राहत मिलने का तर्क दिया जा रहा है। सहकारी समितियों की गड़बड़ियों से भी आमजन को बचाने के लिए यह कवायद चल रही है। बताया जा रहा है कि अभियान में ज्यादा से ज्यादा पट्टे देने के लिए यह किया जा रहा है।

इन विकल्पों पर नजर
-कॉलोनी की भूमि के मालिकाना हक के लिए खातेदार या काश्तकार की ओर से बेचान के दस्तावेज को आधार बनाया जा सकता है।
-कॉलोनी की विकास समिति नियमन के लिए संबंधित निकाय को विस्तृत प्रस्ताव दे सकती है।
-यदि विकास समिति नहीं हैं तो कॉलोनी के भूखंडधारी मिलकर निकाय में नियनम के लिए आवेदन कर सकते हैं।
-भूखंड पर कब्जे के तौर पर बिजली-पानी के बिल व राशन कार्ड आदि दस्तावेज को आधार बनाया जा सकता है।
-जिन कॉलोनियों का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं,उनके नियमन को लेकर यही प्रक्रिया अपनाई जाती है।
-एक भूखंड पर एक से अधिक दावेदार होने या कॉलोनी की भूमि पर विवाद की स्थिति में निकाय आपत्तियां मांग सकता है। इन आपत्तियों की जांच के आधार पर निकाय के अधिकारी नियमन का फैसला ले सकेंगे।

लम्बी है कि सहकारी समितियों की गड़बड़ियों की सूची
राज्य के शहरों में गृह निर्माण सहकारी समितियों की ओर से करीब ढाई हजार कॉलोनियां सृजित की गई हैं। इनमें गड़बड़ियों का भी खेल चला। राजस्थान भू राजस्व अधिनियम 1956 में धारा 90बी जोड़ी गई। इस धारा के तहत ऐसी कॉलोनियों के नियमन के लिए 17 जून 1999 की कट ऑफ डेट निर्धारित की गई। इसके बावजूद कृषि भूमि पर इस कट ऑफ डेट से पिछली तारीखों में गृह निर्माण सहकारी समितियों की ओर से भूखंड काटने का गोरखधंधा चलता रहा। सड़क, सुविधा क्षेत्र पर भी भूखंड आवंटित कर दिए गए। ऐसे ही कई मामलों में भूखंडधारी सोसायटी के पास जाते हैं और उनके छोटे से काम के लिए भी मोटी राशि लेते रहे हैं।