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राज्य में कैदियों ने बनाए 1.50 लाख मास्क, कमाए 12 लाख

कोरोना ने बदला काम का तरीका

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राज्य में कैदियों ने बनाए 1.50 लाख मास्क, कमाए 12 लाख

उदयपुर के केन्द्रीय कारागृह में मास्क तैयार करते बंदी।

उदयपुर. कोरोना से बचाव के लिए मास्क की अनिवार्यता के बाद जेल प्रशासन ने भी बंदियों को सिलाई मशीन व कपड़ा उपलब्ध करवाते हुए मास्क बनवाए। लॉकडाउन की अवधि से लेकर अब तक पूरे राजस्थान के संभाग मुख्यालय की जेलों पर 1.50 लाख मास्क बनाकर करीब 12 लाख रुपए का राजस्व अर्जित किया गया। जेल के अंदर ही बने पावरलूम कपड़े से संभाग की जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, उदयपुर, अजमेर, भरतपुर, कोटा व अलवर जेलों में मास्क बनाए गए। हर जेल पर उपलब्ध पांच-छह सिलाई मशीनों के अनुसार कैदियों ने ये मास्क तैयार किए। सरकारी दर से आठ रुपए प्रति मास्क आम जनता व सरकारी विभागों को बेचे गए। अब भी लगातार मांग जारी होने से मास्क बनाने का काम निरंतर चल रहा है। अकेले उदयपुर जिले में 10 हजार मास्क बनाकर सरकारी विभागों में बेचे गए। उदयपुर जेल प्रबंधन में कोई भी संगठन या व्यक्ति कपड़ा व धागा उपलब्ध कराता है तो कैदी का 130 रुपए प्रतिदिन का मेहनताना देकर 100 मास्क बनाने की व्यवस्था कर रखी है।

भीलवाड़ा: बंदियों ने बनाए 800 मास्क, कारागार में बांटे

जिला कारागार में दो महिला समेत पांच बंदियों ने मिलकर लॉकडाउन में 800 मास्क तैयार किए। इनको जिला कारागार, गंगापुर, मांडलगढ़, गुलाबपुरा व शाहपुरा उपकारागार में बंदियों को वितरित कराया गया। मास्क निशुल्क दिए गए। अब अजमेर सेंट्रल जेल से 500 मीटर कपड़ा भेजा गया है। इससे मास्क तैयार कर जयपुर भेज जाएंगे। इन मास्कों को जयपुर में निजी कम्पनी के जरिए सशुल्क वितरित कराया जाएगा। 500 मीटर कपड़े से चार हजार मास्क तैयार होंगे। इनमें अब तक 1250 मास्क तैयार कर लिए। 100 मास्क बनाने पर बंदी को 130 रुपए मेहनताना मिलेगा।

जोधपुर: कोरोना से जंग में कैदी भी कर रहे सहयोग

कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने में स्वास्थ्यकर्मी, पुलिस व प्रशासन के साथ-साथ केन्द्रीय कारागार जोधपुर में सजा काट रहे कैदी भी सहयोग करने में जुटे हैं। लॉक डाउन के दौरान जेल के कारखाने में अब तक दस हजार से अधिक कपड़े के मास्क बनाकर सप्लाई किए जा चुके हैं। इससे न सिर्फ कैदियों को रोजगार मिल रहा है, बल्कि जेल प्रशासन को भी आय व कोरोना जंग में सहयोग भी हो रहा है।

कोटा: जेल में बन रहे सेनेटाइजर और मास्क

आमतौर पर जेल का नाम सुनते ही अपराधियों व बदमाशों की तस्वीर दिमाग में घूमने लगती है, लेकिन इस समय केन्द्रीय कारागृह कोटा कोविड से संघर्ष में सहयोग कर रहा है। यहां सूती कपड़े के धुलाई योग्य मास्क बनाकर इन्हें विभिन्न विभागों व आमजन को महज पांच रुपए में उपलब्ध करवाया जा रहा है। जेल से जिला प्रशासन, हाड़ौती भर के पुलिस प्रशासन, विभिन्न जेलों, सामाजिक संगठनों, लोगों को मास्क उपलब्ध करवाए गए। जेल में अब तक पांच हजार से अधिक मास्कों का निर्माण हो चुका है।

सीकर: जेल में नवाचार सुरक्षा के लिए कैदियों ने बनाए मास्क

कहते है कि जान है तो जहान है। कोरोना महामारी से बचने के लिए सीकर जेल में कैदियों ने नवाचार शुरू किए है। कोरोना से बचाव के लिए जेल में कैदियों ने खुद की सुरक्षा के लिए पांच सौ मास्क बना डाले। शिवसिंहपुरा स्थित जेलर सौरभ स्वामी ने बताया कि लॉकडाउन के शुरू होने के बाद मास्क बनाने के लिए खादी का कपड़ा लाकर कैदियों को दिया गया। जेल में करीब तीन सौ कैदी है। इसके बाद कैदी रामनिवास, ताराचंद, रतनलाल, मदनलाल ने मिलकर जेल में बंद सभी कैदियों के लिए मास्क बनाने का काम शुरू किया। कुछ कैदियों ने काटने व छंांटने में भी मदद की। अब तक पांच सौ से अधिक मास्क बनाए गए। हालांकि इन मास्कों को बेचा नहीं जाता।

पलसाना स्कूल की कर दी-रंगाई पुताई

लॉकडाउन अवधि में पलसाना स्कूल में विभिन्न राज्यों के 54 से अधिक निर्माण श्रमिक ठहरे हुए थे। इन श्रमिकों ने अपने स्तर पर स्कूल भवन की पुताई शुरू कर दी। बाद में सरपंच, प्रधानाचार्य व स्कूल स्टाफ ने रंग-रोगन की सामग्री लाकर दे दी। अब स्कूल पूरी तरह चमकने लगा है।

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