
निजी डाटा विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति को भेजा
-कानून मंत्री प्रसाद ने लोकसभा में रखा प्रस्ताव
-20 सदस्यीय होगी संसदीय समिति
-दोनों सदनों के सदस्य होंगे शामिल
नई दिल्ली। विपक्ष की मांग पर ( On Demand Of Opposition ) वैयक्तिक डाटा संरक्षण विधेयक 2019 ( private data bill ) को संयुक्त संसदीय प्रवर समिति ( Joint Parliamentary Committee) को भेज ( Send ) दिया गया। ( Jaipur News) विधि एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने लोकसभा में इसका प्रस्ताव किया और कहा कि यह संसदीय समिति 20 सदस्यों की होगी, जिसमें लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों के सदस्य शामिल होंगे। उन्होंने लोकसभा से मीनाक्षी लेखी, पी.पी. चौधरी, अजय भट्ट, संजय जायसवाल, किरीट सोलंकी, अरङ्क्षवद धर्मपुरी, उदय प्रताप ङ्क्षसह, गौरव गोगोई, प्रो. सौगत पी.वी. मिथुन रेड्डी, रितेश पांडे सहित करीब 12 सदस्यों के नाम लिए और राज्यसभा में प्रस्ताव भेज कर नाम मंगाने की बात कही।
-प्रो. सौगत राय समिति से देंगे त्याग-पत्र
इस बीच तृणमूल कांग्रेस के नेता सुदीप बंद्योपाध्याय ने अध्यक्ष से आग्रह किया कि प्रो. सौगत राय पर बहुत सी जिम्मेदारियां हैं, इसलिए उनकी बजाय महुआ मोइत्रा को शामिल किया जाए। इस पर संसदीय कार्य राज्य मंत्री ने कहा कि वह चर्चा करके बता देंगे। लेकिन प्रसाद ने श्री बंद्योपाध्याय से अनुरोध किया कि चूंकि प्रो. सौगत राय एक विद्वान सांसद हैं इसलिए वह चाहेंगे कि उनकी योग्यता का पूरा लाभ इस विधेयक को लेकर मिले। इस पर बंद्योपाध्याय ने इसे पार्टी का निर्णय बताया और कहा कि वह स्वयं मानते हैं कि प्रो. सौगत राय पूरी संसद में सर्वश्रेष्ठ सांसद हैं। बाद में तय हुआ कि प्रो. सौगत राय समिति से त्याग-पत्र देंगे और मोइत्रा को चुना जाएगा।
-विधेयक पेश करने पर विपक्ष ने किया विरोध
इससे पहले प्रसाद ने भोजनावकाश के पहले जब सदन में इस विधेयक को पेश किया तो कांग्रेस, द्रविड मुन्नेत्र कषगम, तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों के सदस्यों ने इसका कड़ा विरोध किया। विपक्षी दलों के सदस्यों के भारी शोर-शराबे के बीच अध्यक्ष ने विधेयक पेश होने की प्रक्रिया पूरी की, लेकिन जैसे ही उन्होंने मंत्री को विधेयक पेश करने के लिए कहा विपक्ष ने मतविभाजन की मांग कर दी।
-सदन में यूं चला घटनाक्रम
इस पर मतविभाजन से पहले विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया में शामिल होने की बजाय विधेयक को संसद की स्थायी समिति को भेजने की मांग दोहराई। अध्यक्ष ने कहा कि अब मतविभाजन की पूरी प्रक्रिया हो चुकी है, इसलिए विधेयक को पेश करने को लेकर मतविभाजन की प्रक्रिया ही पूरी होनी है। विपक्ष के मत विभाजन में शामिल नहीं होने पर अध्यक्ष ने कानून मंत्री को विधेयक पेश करने के लिए कहा तो पूरा विपक्ष सदन से बहिगर्मन कर गया। विधेयक पेश करते समय प्रसाद ने विधेयक को लेकर सदस्यों की आशंकाओं को निर्मूल बताया और कहा कि विधेयक अति महत्वपूर्ण है और इसमें निजी डाटा को संरक्षित रखने की पूरी व्यवस्था की गई है। विधेयक को सदन में लाने से पहले सभी आपत्तियों को सुनकर दूर किया जा चुका है। इस संबंध में हाईकोर्ट के दिशा निर्देशों का भी पूरा ध्यान रखा गया है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक को तैयार करने से पहले उच्चतम न्यायालय की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई, जिसको देशभर से लोगों ने 2000 से ज्यादा आपत्तियां भेजी। उन सभी आपत्तियों को बारीकी देखकर उनका निराकरण किया गया।
-विधेयक में ये प्रावधान
विधेयक में व्यवस्था है कि यदि किसी व्यक्ति की अनुमति के बिना डाटा बाहर भेजा जाता है तो इसको लेकर कड़े सजा का प्रवधान तथा करोड़ों रुपए के अर्थदंड की व्यवस्था की गई है।
Published on:
12 Dec 2019 01:38 am
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