
puppet including folk arts
भारतीय संस्कृति का प्रतिबिंब लोक कलाओं में झलकता है, इन्हीं लोक कलाओं में कठपुतली भी शामिल है। यह देश की सांस्कृतिक धरोहर होने के साथ-साथ प्रचार-प्रसार का सशक्त माध्यम भी है, लेकिन आधुनिक सभ्यता के चलते मनोरंजन के नित नए साधन आने से सदियों पुरानी यह कला अब लुप्त होने की कगार पर है।
देशभर की पपेट्स शैलियों को बचाने का जिम्मा अब जवाहर कला केन्द्र ने उठाया है। राजस्थान सहित देश के अन्य राज्यों के पपेटियंस को जवाहर कला केन्द्र (जेकेके) एक स्पेशल वर्कशॉप के जरिए इंटरनेशनल लेवल के पपेट्स शो की जानकारी देगा।
साथ ही जमाने के साथ बदलते कठपुतली के अंदाज को भी सिखाया जाएगा। इसके लिए जेकेके देश के सबसे बड़े पपेट आर्टिस्ट दादी पदमजी को वर्कशॉप को कंडक्ट करने के लिए बुलवा रहा है। दादी इस वर्कशॉप में देश के 10 ट्रेडिशनल पपेटियंस को ट्रेनिंग देंगे और इस लुप्त होती परम्परागत कला को एक नई दिशा प्रदान करेंगे। यह वर्कशॉप 15 फरवरी से शुरू होगी, जो आठ मार्च तक नियमित आयोजित होगी।
Published on:
07 Feb 2017 09:57 am
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