
शांत रह कर जी सकते हैं आप ज्यादा
मेडिकल जर्नल नेचर में प्रकाशित एक अध्ययन में, हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के शोधकर्ताओं ने रिपोर्ट की है कि कम तंत्रिका गतिविधि वाले शांत मस्तिष्क लंबे जीवन का नेतृत्व कर सकते हैं। 60 से 100 से अधिक की उम्र में मरने वाले लोगों के मस्तिष्क के ऊतकों का विश्लेषण करने के बाद, शोधकर्ताओं ने कहा कि उन्होंने देखा कि सबसे लंबे समय तक जीवित रहने वाले लोगों में तंत्रिका गतिविधि से संबंधित जीन का स्तर कम था।
अपनी बॉडी की सुनिए
आपको पता होना चाहिए कि आपकी देह में चल क्या रहा है। अपनी सांसों पर ध्यान दीजिए। दिन भर में कुछ समय ध्यान के लिए निकालिए, यह आपके पूरे दिन को गर्मजोशी से भरा रख सकता है। इससे आपकी एकाग्रता बढ़ेगी।
सुनना एक चमत्कार है
सामने वाले की बात सुनने से पहले ही अपनी बात कहने की जल्दबाजी किसी को भी बैचेन बनाए रखती है। इससे उस क्षण का आनंद भी छूट जाता है जो मौजूदा वक्त आपके पास है। ऐसे में उसे याद रखना भी मुश्किल है। याद रखिए, बोलना सोना है तो चुप रहना चांदी है। समझदार वाली चुप्पी को अपनाइए।
चार्ट बनाइए
दो चार्ट बनाइए, पहला यह कि आप अपने चौबीस घंटे कैसे बिताना चाहते हैं और दूसरा यह कि आप उन्हें बिता कैसे रहे हैं। वास्तव में आपको अपने समय नियोजन पर पूरा ध्यान देना चाहिए। इसके अभाव में कामों को लेकर बैचेनी घर कर सकती है।
खाने पर ध्यान दें
आप जैसा खाएंगे, आपके विचार भी वैसे ही होंगे। टीवी के सामने बैठे चिप्स खाना भले ही आपको सुहाता हो लेकिन यह तय मानिए कि यह आपके मस्तिष्क में उत्तेजना ही भरेगा। अगर आपका लक्ष्य अपने मस्तिष्क को शांत रखना है तो आपके भोजन को भी सौम्य होना चाहिए।
बर्नआउट को पहचानो
कई लोग तब तक बर्नआउट स्वीकार नहीं करते हैं जब तक कि वे पूरी तरह से जल न जाएं। दूसरे शब्दों में थकने से पहले आराम करें।लक्षणों में भावनात्मक थकावट, व्यक्तिगत उपलब्धि की भावना की कमी, उत्तेजना की कमी और जलन का व्यापक मूड शामिल हो सकता है।
Published on:
31 Oct 2019 02:35 pm
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